नए बनाम पुराने टैक्स व्यवस्था: कौन सा विकल्प है आपके लिए बेहतर?
New Tax Regime vs Old Tax Regime: किसमें होगी ज्यादा बचत? जानिए आपके लिए कौन है बेस्ट
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भारत में सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करते समय नए और पुराने टैक्स व्यवस्था के बीच चयन का विकल्प है। पुराने टैक्स व्यवस्था में कई छूटें और कटौतियां उपलब्ध हैं, जबकि नए टैक्स व्यवस्था में कम टैक्स दरें और कम कागजी कार्यवाही है। दोनों व्यवस्थाएं अलग-अलग लाभ प्रदान करती हैं, और करदाताओं को अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।
- 01पुराने टैक्स व्यवस्था में 2.5 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता, जबकि नए व्यवस्था में 4 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री है।
- 02पुराने टैक्स व्यवस्था में करदाता विभिन्न कटौतियों का दावा कर सकते हैं, जैसे कि प्रोविडेंट फंड और होम लोन की EMI।
- 03नए टैक्स व्यवस्था में 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है, लेकिन इसमें अधिकांश छूटें उपलब्ध नहीं हैं।
- 04पुराने टैक्स व्यवस्था उन करदाताओं के लिए फायदेमंद है जो 4 लाख रुपये से अधिक की कटौतियों का दावा करते हैं।
- 05करदाताओं को अपनी सैलरी संरचना और दीर्घकालिक निवेश योजनाओं का ध्यानपूर्वक आकलन करना चाहिए।
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भारत में सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को आयकर रिटर्न दाखिल करते समय नए और पुराने टैक्स व्यवस्था के बीच चयन करने का विकल्प मिलता है। पुराने टैक्स व्यवस्था में करदाता विभिन्न छूटों और कटौतियों का लाभ उठा सकते हैं, जैसे कि प्रोविडेंट फंड, जीवन बीमा, और होम लोन की EMI। इस व्यवस्था के तहत 2.5 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता, 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक 5 प्रतिशत, 5 लाख से 10 लाख रुपये तक 20 प्रतिशत और 10 लाख रुपये से अधिक पर 30 प्रतिशत टैक्स लगाया जाता है। दूसरी ओर, नए टैक्स व्यवस्था में कम टैक्स दरें हैं और 4 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री है। हालांकि, इसमें अधिकांश छूटें उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन वेतनभोगी करदाता 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन ले सकते हैं। दोनों व्यवस्थाएं अलग-अलग लाभ प्रदान करती हैं, इसलिए करदाताओं को अपनी सैलरी संरचना, छूट और दीर्घकालिक निवेश योजनाओं का ध्यानपूर्वक आकलन करना चाहिए।
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करदाताओं को अपनी आय और निवेश के अनुसार टैक्स व्यवस्था का चयन करने से टैक्स बचत में मदद मिल सकती है।
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