बंगाल चुनाव में केंद्रीय बलों की तैनाती पर टीएमसी का विरोध
‘मिलिट्री स्टाइल में कब्जा?’ बंगाल में सेंट्रल फोर्सेज की मीटिंग पर TMC हमलावर
Aaj Tak
Image: Aaj Tak
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण से पहले कोलकाता में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। टीएमसी ने इस पर केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह चुनाव में मिलिट्री स्टाइल में कब्जा करने की योजना बना रही है। राज्य में 2.4 लाख केंद्रीय जवान तैनात किए गए हैं, जो अब तक की सबसे बड़ी तैनाती है।
- 01टीएमसी ने केंद्रीय बलों की बैठक पर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है।
- 02बंगाल में चुनावी सुरक्षा के लिए 2.4 लाख केंद्रीय जवान तैनात किए गए हैं।
- 03टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों को संवेदनशील क्षेत्रों से हटाया जा रहा है।
- 04चुनाव आयोग ने तैनाती को चुनावी हिंसा की रोकथाम के लिए आवश्यक बताया है।
- 05पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होगा।
Advertisement
In-Article Ad
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण से पहले कोलकाता के 'साइंस सिटी' में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की एक बड़ी बैठक हुई। इस बैठक में CRPF, BSF, CISF, ITBP और SSB के प्रमुख शामिल हुए। टीएमसी ने इस पर केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह बंगाल में मिलिट्री स्टाइल में कब्जा करने की योजना बना रही है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि गृह मंत्रालय कश्मीर और मणिपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से बलों को हटाकर बंगाल में तैनात कर रहा है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मजाक बनाने जैसा बताया। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और CISF ने कहा कि यह बैठक एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड बनाने के लिए थी। केंद्र सरकार का तर्क है कि बंगाल में चुनावी हिंसा का पुराना इतिहास रहा है, इसलिए इतनी भारी तैनाती जरूरी है। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होगा और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
Advertisement
In-Article Ad
इस भारी तैनाती से मतदाताओं में डर और असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है, जो चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि केंद्रीय बलों की तैनाती चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करेगी?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।



