महेश्वर की ऐतिहासिक धरोहरें संकट में, प्रशासन की अनदेखी जारी
सिंहस्थ को लेकर हो रहा ताबड़तोड़ निर्माण, लेकिन प्राचीन धरोहरों का नहीं हो रहा जिर्णोद्धार, उगे रहे पेड़-पौधे!

Image: News 18 Hindi
मध्य प्रदेश के महेश्वर में आगामी सिंहस्थ महापर्व के लिए नए निर्माण कार्यों पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन प्राचीन धरोहरों के जीर्णोद्धार की अनदेखी की जा रही है। किले की दीवारें और मंदिर जर्जर हो रहे हैं, जिससे स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को खतरा है।
- 01महेश्वर में ऐतिहासिक धरोहरों का रखरखाव न होने से कई दीवारें और मंदिर जर्जर हो चुके हैं।
- 02नर्मदा मार्ग पर किले की दीवार 2007 से जीर्णोद्धार के बिना है, और कई मंदिरों की दीवारें गिरने की कगार पर हैं।
- 03स्थानीय प्रशासन ने धरोहरों के संरक्षण के लिए एक तकनीकी सूची तैयार की है और राज्य शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है।
- 04महेश्वर की धरोहरें देवी अहिल्याबाई होल्कर के शासनकाल की हैं, जो अब संकट में हैं।
- 05स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को हर समय किसी बड़े हादसे का डर सताता है।
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मध्य प्रदेश के महेश्वर में आगामी सिंहस्थ महापर्व के लिए नए निर्माण कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि प्राचीन धरोहरों के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐतिहासिक किले की दीवारें, जो 2007 में भारी बारिश के कारण ढह गई थीं, अब तक जीर्णोद्धार से वंचित हैं। नर्मदा नदी के किनारे स्थित कई छोटे बड़े मंदिर भी जर्जर हो चुके हैं। इन धरोहरों के चारों ओर उगे पेड़-पौधे और वनस्पतियां उन्हें कमजोर कर रहे हैं। महेश्वर की एसडीएम पूर्वा मडलोई ने बताया कि इन जर्जर धरोहरों की एक विस्तृत तकनीकी सूची तैयार की गई है और राज्य शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है। इसके अलावा, पुरातत्व और पर्यटन विभाग को भी आवश्यक सुधार के लिए पत्राचार किया गया है। हालाँकि, स्थानीय प्रशासन की अनदेखी के कारण इन धरोहरों का संरक्षण खतरे में है।
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महेश्वर की ऐतिहासिक धरोहरों के जीर्णोद्धार न होने से स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को हर समय खतरा बना हुआ है।
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