भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का प्रभाव
भारत में 10 दिन में तीसरी बार क्यों बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम? ईरान, अमेरिका और होर्मुज वाला एंगल समझें
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पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार तीसरी बार वृद्धि हुई है। कच्चे तेल की कीमतें 109.31 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिससे भारत का तेल आयात महंगा हो गया है। सरकारी कंपनियों की अंडर-रिकवरी बढ़ती जा रही है, जबकि राज्य सरकारें VAT में कटौती करने को तैयार नहीं हैं।
- 01पेट्रोल की कीमत दिल्ली में 98.64 रुपये से बढ़कर 99.51 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
- 02डीजल की कीमत 91.58 रुपये से बढ़कर 92.49 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
- 03कच्चे तेल की औसत कीमत फरवरी 2026 में 69.01 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 21 मई 2026 को 109.31 डॉलर प्रति बैरल हो गई है।
- 04भारत 85% से अधिक कच्चा तेल और 60% LPG अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात करता है।
- 05राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर VAT में कोई कटौती नहीं कर रही हैं, जिससे कीमतें और बढ़ रही हैं।
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पश्चिम एशिया में 85 दिनों से जारी युद्ध के कारण भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार तीसरी बार वृद्धि हुई है। हाल ही में पेट्रोल की कीमत 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 92.49 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इस संकट के दौरान, कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़कर 109.31 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो कि फरवरी 2026 में 69.01 डॉलर प्रति बैरल थी। भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल और 60% LPG अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात करता है, जिसमें से 40% कच्चा तेल और 90% LPG स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के रास्ते आता है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव ने इस मार्ग पर कार्गो जहाज़ों की आवाजाही को बाधित किया है, जिससे भारत का कुल तेल आयात खर्च 60% तक बढ़ गया है। सरकार ने मार्च 2026 में एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी, लेकिन राज्य सरकारें VAT में कोई कमी करने के लिए तैयार नहीं हैं।
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पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि से आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, जिससे परिवहन और दैनिक जीवन की लागत में वृद्धि होगी।
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