भारत में सोने पर 15% ड्यूटी से व्यापार घाटा कम होगा या नहीं?
सोने पर 15% ड्यूटी से क्या घटेगा भारत का ट्रेड डेफिसिट? जानिए क्यों इतना आसान नहीं है यह गणित
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भारत सरकार ने सोने और चांदी के आयात पर 15% शुल्क बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य व्यापार घाटा कम करना है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपाय सीमित प्रभाव डालेगा, क्योंकि आयात में वृद्धि का मुख्य कारण मांग नहीं, बल्कि वैश्विक कीमतों में उछाल है।
- 01सरकार ने सोने के आयात पर 15% शुल्क बढ़ाया है।
- 02विशेषज्ञों का मानना है कि आयात में वृद्धि का कारण मांग नहीं, बल्कि कीमतें हैं।
- 03व्यापार घाटा कम करने के लिए सोने के आयात में 20-25% की कमी की आवश्यकता हो सकती है।
- 04सोने की मांग स्थिर है, लेकिन निवेश के रूप में बढ़ रही है।
- 05कच्चा तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स भारत के व्यापार घाटे के प्रमुख कारण हैं।
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भारत सरकार ने बुधवार को सोने और चांदी के आयात पर 15% शुल्क बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य रुपये पर दबाव कम करना और व्यापार घाटा संतुलित करना है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस निर्णय का प्रभाव उतना सीधा नहीं होगा, क्योंकि आयात में वृद्धि की असली वजह वैश्विक कीमतों में उछाल है, न कि मांग में वृद्धि। भारत में सोने का आयात पिछले कुछ वर्षों में लगभग 700 से 800 टन के आसपास स्थिर रहा है। चालू वित्त वर्ष में सोने का आयात पिछले वर्ष की तुलना में 15 अरब डॉलर अधिक रहा है, जिससे व्यापार घाटा 20 से 25 अरब डॉलर के बीच बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, सोने के आयात में गिरावट से व्यापार घाटा अधिकतम 10 से 15 अरब डॉलर तक कम हो सकता है, जो कुल व्यापार घाटे का लगभग 5% होगा। इसके अलावा, सोने की मांग में स्थिरता बनी हुई है, लेकिन निवेश के रूप में इसकी मांग में 54% की वृद्धि हुई है।
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अगर सोने के आयात में कमी आती है, तो व्यापार घाटा कुछ हद तक कम हो सकता है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है।
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