भारत ईरान में चाबहार पोर्ट परियोजना में अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रहा है
₹11000000000 का 'गेम चेंजर प्रोजेक्ट', क्या भारत बेचने जा रहा है ईरान में अपना सबसे बड़ा निवेश; आखिर क्यों?
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भारत, ईरान में चाबहार बंदरगाह परियोजना में अपनी हिस्सेदारी एक स्थानीय कंपनी को बेचने की योजना बना रहा है, जो अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के समाप्त होने से पहले है। यह कदम भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पाकिस्तान को बायपास करते हुए मध्य एशिया तक व्यापार की सुविधा प्रदान करेगा।
- 01भारत चाबहार बंदरगाह परियोजना में अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहा है।
- 02यह कदम अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों के समाप्त होने से पहले उठाया जा रहा है।
- 03चाबहार पोर्ट पाकिस्तान को बायपास करते हुए व्यापार की सुविधा देता है।
- 04यह परियोजना भारत के लिए कूटनीतिक और व्यापारिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
- 05भारत ने इस परियोजना में लगभग 120 मिलियन डॉलर का निवेश किया है।
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भारत ईरान में चाबहार बंदरगाह परियोजना में अपनी हिस्सेदारी एक स्थानीय ईरानी कंपनी को बेचने की तैयारी कर रहा है। यह निर्णय अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के समाप्त होने से पहले लिया जा रहा है। चाबहार पोर्ट भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थान है, जो पाकिस्तान को बायपास करते हुए मध्य एशिया और अफगानिस्तान के साथ व्यापार की सुविधा प्रदान करता है। भारत ने इस परियोजना में 120 मिलियन डॉलर का निवेश किया है और यह पोर्ट इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। चाबहार पोर्ट चीन के ग्वादर पोर्ट के निकटता के कारण भी महत्वपूर्ण है, जिससे भारत की उपस्थिति क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित करने में मदद करती है।
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यह कदम भारत के व्यापारिक संबंधों को मजबूत करेगा और ईरान के साथ आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देगा।
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