कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन T-141 और उसके शावकों की रहस्यमय मौत
कान्हा में ‘साइलेंट किलर’ का हमला? 9 दिन में बाघिन T-141 और उसके चार शावकों का पूरा कुनबा खत्म
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मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन T-141 और उसके चार शावकों की मौत ने जैविक संकट की आशंका पैदा कर दी है। प्रारंभिक जांच में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के संक्रमण का संदेह है, जो वन्यजीवों के लिए घातक साबित हो सकता है।
- 01बाघिन T-141 और उसके चार शावकों की मौत से जैविक संकट की आशंका बढ़ी।
- 02कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के संक्रमण का संदेह है।
- 03मौतें केवल 9 दिनों में हुईं, जिससे चिंता बढ़ गई है।
- 04बाघों में गंभीर श्वसन तंत्र संक्रमण के संकेत मिले हैं।
- 05कान्हा टाइगर रिजर्व में जैव सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
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मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन T-141 और उसके चार शावकों की रहस्यमय मौत ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था को झकझोर दिया है। 9 दिनों के भीतर परिवार के सभी सदस्य खत्म हो गए। प्रारंभिक जांच में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के संक्रमण का संदेह है, जो एक अत्यंत घातक संक्रामक रोग है। 21 अप्रैल को पहले शावक की मौत हुई, उसके बाद अन्य शावकों की भी मौतें हुईं। बाघिन और अंतिम शावक को रेस्क्यू कर क्वारंटाइन सेंटर लाया गया, लेकिन उनकी स्थिति बिगड़ गई। जांच के दौरान सभी बाघों में गंभीर श्वसन तंत्र संक्रमण के संकेत मिले। इस घटना ने कान्हा टाइगर रिजर्व में जैव सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं। यदि वायरस का संक्रमण घरेलू कुत्तों से हुआ है, तो यह एक बड़ी विफलता मानी जाएगी। यह केवल पांच बाघों की मौत नहीं, बल्कि एक संभावित बड़े जैविक खतरे की चेतावनी है।
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यदि कैनाइन डिस्टेंपर वायरस का संक्रमण अन्य बाघों में फैलता है, तो यह बाघों की संख्या को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
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