नीट परीक्षा रद्द: कुमाऊं के अभिभावकों को लगी डेढ़ करोड़ से अधिक की चपत, दोबारा परीक्षा से बढ़ेगी परेशानी
Amar Ujala
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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने रद्द की गई नीट परीक्षा का शुल्क वापस करने और अब परीक्षा की नई तारीख का ऐलान कर दिया है। दोबारा परीक्षा में शामिल होने में परीक्षार्थियों को फिर से पैसा और समय दोनों ही बर्बाद होंगे। तीन मई को कुमाऊं के छह जिलों से सैकड़ों किलोमीटर दूर हल्द्वानी व पंतनगर स्थित परीक्षा केंद्रों तक परीक्षार्थी पहुंचे थे। अब परीक्षा रद्द होने के बाद खर्च के साथ ही परीक्षार्थियों को हुए तनाव का हिसाब कौन देगा? यह सवाल में शामिल परीक्षार्थी पूछ रहे हैं। परीक्षा रद्द होने से कुमाऊं मंडल के अभिभावकों को करीब 1 करोड़ 53 लाख रुपये की चपत लगी है। एनटीए ने कुमाऊं मंडल के नीट परीक्षार्थियों के लिए अल्मोड़ा के अलावा हल्द्वानी और पंतनगर में परीक्षा केंद्र बनाए थे। परीक्षा से एक दिन पहले मंडल के विभिन्न जिलों से 3409 परीक्षार्थियों ने किसी तरह नैनीताल जिले के नौ परीक्षा केंद्रों में पहुंचकर परीक्षा दी। कुछ दिन बाद नीट का पेपर लीक होने और परीक्षा रद्द होने की खबर आ गई। इससे परीक्षार्थियों की साल भर की मेहनत पर एक झटके में पानी फिर गया। ऐसे लगी पहाड़ के अभिभावकों को चपत नीट परीक्षा रद्द होने से कुमाऊं मंडल के अभिभावकों को करीब 1 करोड़ 53 लाख 40 हजार 500 रुपये की चपत लगी। कुमाऊं के दूरस्थ जिलों से एक अभ्यर्थी को हल्द्वानी व पंतनगर स्थित परीक्षा केंद्र आने जाने में लगभग 1500-2000 रुपये व्यय करना पड़ा। परीक्षा से एक दिन पहले होटल में ठहरने, खाने आदि में उसे 2000 रुपये तक खर्च करना पड़ा। फोटो, डॉक्यूमेंट आदि में उसे 300 रुपये खर्च करने पड़े। यानि एक बच्चे को घर से परीक्षा केंद्र आने जाने में 4000-4500 रुपये तक व्यय करना पड़ा। नैनीताल जिले में 3909 बच्चों ने परीक्षा दी तो उनके परीक्षा केंद्र तक आने जाने, रहने, खाने में ही 1 करोड़ 53 लाख 40 हजार 500 रुपये की चपत लग गई। परीक्षार्थियों का कहना है कि इस रकम की भरपाई कौन करेगा। परीक्षा केंद्र पहुंचने में लगे थे 7-10 घंटे पिथौरागढ़ से हल्द्वानी पहुंचने में सात से नौ घंटे तक लगते हैं। बागेश्वर से हल्द्वानी पहुंचने में भी छह घंटे का समय लगता है। दूरदराज के परीक्षार्थी अपने अभिभावकों के साथ इतनी लंबी दूरी तय कर एक दिन पहले ही हल्द्वानी और पंतनगर पहुंच गए थे। अधिकांश ने होटलों में शरण ली। आने-जाने और खाने-पीने व रहने में खर्च तो हुआ ही साथ ही समय अलग खर्च हुआ। परीक्षार्थियों का कहना है कि इस सब की भरपाई कौन करेगा। परीक्षा की नई तिथि घोषित होने के बाद एक बार फिर से अभिभावकों को इतनी ही धनराशि दोबारा खर्च करनी होगी, यानि एक परीक्षा के लिए दो दो बार आर्थिक और मानसिक दबाव। पिथौरागढ़ से हल्द्वानी पहुंचने में सात घंटे लगे। रास्ते में जाम ने अलग परेशान किया। घर से निकली थी तो मां ने कहा था डाक्टर बनकर आना। परीक्षा देने के बाद पता चला कि परीक्षा रद्द हो गई है। आने जाने, रहने खाने में चार हजार से अधिक का खर्च हुआ। इसकी भरपाई कौन करेगा।- पूजा जोशी, नीट परीक्षार्थी मैं मध्यमवर्गीय परिवार का हूं। नीट का फार्म भरने के लिए बमुश्किल पैसे जुटाए थे। एनटीए यह पैसा तो वापस कर देगा लेकिन बागेश्वर से हल्द्वानी आने जाने और रहने-खाने का भुगतान कौन करेगा। अब दोबारा फिर से उतना पैसा खर्च करना पड़़ेगा।- मोहित सिंह, नीट परीक्षार्थी पिछले एक साल से नीट की परीक्षा की तैयारी कर रही हूं। तीन जून को परीक्षा थी लिहाजा उससे पहले दो महीने तक रात में केवल तीन से चार घंटे ही सोती थी। पूरा समय पढ़ाई में लगाती थी। मिला क्या पेपर लीक, परीक्षा रद्द। आने-जाने, रहने-खाने में पैसा अलग से व्यर्थ हुआ। एनटीए को इसका भी हिसाब देना होगा।-नेहा बिष्ट, नीट परीक्षार्थी मैंने नीट की तैयारी के लिए एक साल का ड्राप लिया था। पूरे साल मन लगाकर तैयार की। एनटीए ने पेपर लीक मामले में सॉरी कह दिया। अब सॉरी कहने से काम नहीं चलेगा। परीक्षार्थियों को जो मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान हुआ है, एनटीए को उसकी भी भरपाई करनी चाहिए।- सुरभि, नीट परीक्षार्थी
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