1 साल से कम उम्र के बच्चों में स्क्रीन टाइम और ऑटिज्म का खतरा: AIIMS अध्ययन
1 साल से पहले बच्चों को मोबाइल दिखाना पड़ सकता है भारी! AIIMS स्टडी में ऑटिज्म का बढ़ा खतरा
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AIIMS, नई दिल्ली की एक स्टडी में पाया गया है कि 1 साल से कम उम्र के बच्चों में अधिक स्क्रीन टाइम का संबंध 3 साल की उम्र में ऑटिज्म के बढ़ते खतरे से है। यह अध्ययन ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) की पहचान और रोकथाम के लिए समय पर हस्तक्षेप की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
- 011 साल से कम उम्र के बच्चों में अधिक स्क्रीन टाइम ऑटिज्म के खतरे से जुड़ा है।
- 02ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) की पहचान 12-18 महीने की उम्र में हो सकती है।
- 03अमेरिकन और इंडियन अकादमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की गाइडलाइंस के अनुसार, 18 महीने से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन टाइम नहीं देना चाहिए।
- 04बच्चों के लिए व्यक्तिगत इंटरैक्शन अधिक फायदेमंद है।
- 05ऑटिज्म की पहचान सामान्यतः 2-3 वर्ष की उम्र में की जाती है।
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AIIMS, नई दिल्ली की एक हालिया स्टडी में यह पाया गया है कि 1 साल से कम उम्र के बच्चों में अधिक स्क्रीन टाइम का संबंध 3 साल की उम्र में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के बढ़ते खतरे से है। प्रोफेसर डॉ. शेफाली गुलाटी के अनुसार, जिन बच्चों का स्क्रीन टाइम 1 साल की उम्र में अधिक था, उनमें ऑटिज्म के लक्षण 3 साल की उम्र में ज्यादा देखे गए। यह अध्ययन इस बात पर जोर देता है कि बच्चों में स्क्रीन टाइम को सीमित करना जरूरी है। अमेरिकन और इंडियन अकादमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की गाइडलाइंस के अनुसार, 18 महीने से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन टाइम नहीं देना चाहिए। इसके बजाय, बच्चों के साथ व्यक्तिगत इंटरैक्शन करना अधिक लाभकारी है। ऑटिज्म की पहचान सामान्यतः 2-3 वर्ष की उम्र में होती है, लेकिन इसे 18 महीने के बाद भी पहचाना जा सकता है।
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यह अध्ययन माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करने और उनके विकास पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करता है।
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