जबलपुर हाई कोर्ट में नर्मदा प्रदूषण पर ठोस सुझाव, अगली सुनवाई 12 मई को
नर्मदा प्रदूषण पर सख्त रुख: जबलपुर हाई कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने दिए ठोस सुझाव, अब अगली सुनवाई 12 मई को
Amar Ujala
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मध्य प्रदेश के जबलपुर में हाई कोर्ट ने नर्मदा नदी के प्रदूषण को रोकने के लिए याचिकाकर्ताओं के ठोस सुझावों को स्वीकार किया। अगली सुनवाई 12 मई को होगी, जिसमें नर्मदा में मिलने वाले नालों के पानी की समस्या पर चर्चा की जाएगी।
- 01नर्मदा नदी के प्रदूषण को रोकने के लिए सुझाव पेश किए गए।
- 02नालों के पानी में भारी मात्रा में सीवेज पाया गया है।
- 03अगली सुनवाई 12 मई को निर्धारित की गई है।
- 04नगर निगम को नर्मदा में साफ पानी की आपूर्ति के लिए मॉनिटरिंग कमेटी बनाने की आवश्यकता है।
- 05नर्मदा में तेल के दीये विसर्जित करने से प्रदूषण बढ़ रहा है।
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने नर्मदा नदी के प्रदूषण को रोकने के लिए याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश किए गए सुझावों को स्वीकार किया। सुझावों में नर्मदा में मिलने वाले नालों की पहचान कर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाने और उपचारित जल के उपयोग को बढ़ावा देने की बात शामिल है। हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को इन सुझावों पर जवाब देने का निर्देश दिया है। हालिया रिपोर्ट में बताया गया कि शहर के सभी नालों के पानी में भारी मात्रा में सीवेज पाया गया है, जिससे यह पानी पीने और सिंचाई के लिए अनुपयोगी हो गया है। अगली सुनवाई 12 मई को होगी, जिसमें नर्मदा नदी के प्रदूषण के समाधान के लिए ठोस उपाय सुझाने पर चर्चा की जाएगी।
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यदि नर्मदा में प्रदूषित पानी की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह स्थानीय स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
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