हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला: नशे में गाड़ी चलाना समाज के लिए खतरा
अदालत: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- नशे में धुत्त होकर गाड़ी चलाना समाज के लिए खतरा, जानें पूरा मामला
Amar Ujala
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नशे की हालत में गाड़ी चलाने वाले व्यक्ति की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि ऐसा करना समाज के लिए खतरा है और सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों में कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।
- 01नशे में गाड़ी चलाना समाज के लिए खतरा है।
- 02अदालत ने सजा को बरकरार रखते हुए नरमी से इनकार किया।
- 03सड़क दुर्घटनाएं भारत में एक गंभीर समस्या बन चुकी हैं।
- 04अदालत ने आरोपी को प्रोबेशन का लाभ देने से इनकार किया।
- 05रैश ड्राइविंग के मामलों में सजा समाज में डर पैदा करने वाली होनी चाहिए।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नशे की हालत में लापरवाही से वाहन चलाने वाले एक व्यक्ति की सजा को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों में दोषियों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। न्यायाधीश राकेश कैंथला ने कहा कि नशे में गाड़ी चलाना न केवल समाज के लिए खतरा है, बल्कि इससे कई मासूमों की जिंदगियां भी जोखिम में पड़ती हैं। अदालत ने आरोपी को प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट का लाभ देने से इनकार करते हुए कहा कि रैश ड्राइविंग के मामलों में सजा ऐसी होनी चाहिए जो समाज में एक डर पैदा करे। आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 279 और मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत एक महीने के कारावास और जुर्माने की सजा दी गई है।
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यह निर्णय सड़क पर नशे में गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को बढ़ावा देगा, जिससे सड़क सुरक्षा में सुधार हो सकता है।
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