भारत की एआई क्रांति: अमेरिका और चीन के समकक्ष पहुंचने की संभावना
AI क्रांति में अमेरिका और चीन से बहुत समय तक पीछे नहीं रहेगा भारत, देश में सबसे ज्यादा रोजगार देनेवाला सेक्टर होगा
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Image: Jagran
भारत, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में देरी से शामिल होने के बावजूद, अपनी युवा जनसंख्या, डेटा और बुद्धिमत्ता के बल पर अमेरिका और चीन के समकक्ष पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत भविष्य में एआई समाधान प्रदाता के रूप में उभर सकता है और रोजगार का स्वरूप बदल जाएगा, लेकिन नौकरियां खत्म नहीं होंगी।
- 01भारत की आईटी इंडस्ट्री ने लंबे समय तक सर्विस सेक्टर पर ध्यान केंद्रित किया, लेकिन अब शोध और उत्पाद विकास पर जोर दिया जा रहा है।
- 02नैसकाम और इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय ने 'फ्यूचर स्किल्स प्राइम' नामक राष्ट्रीय डिजिटल स्किलिंग प्लेटफार्म शुरू किया है।
- 03डॉ. अनिल सिंह परिहार ने बताया कि शिक्षा प्रणाली को अब केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आजीवन सीखने पर जोर देना चाहिए।
- 04एआई में भारत की प्रतिभा पहले से मजबूत है, और यह तकनीक डेटा और एल्गोरिदम पर आधारित है।
- 05विशेषज्ञों का मानना है कि एआई के क्षेत्र में भारत केवल उपभोक्ता नहीं रहेगा, बल्कि एक महत्वपूर्ण समाधान प्रदाता बन सकता है।
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भारत, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दौड़ में देर से शामिल होने के बावजूद, अपनी युवा जनसंख्या, डेटा संग्रहण की क्षमता और बुद्धिमत्ता के बल पर अमेरिका और चीन के समकक्ष पहुंच सकता है। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने एआई और एडवांस रोबोटिक्स में काम शुरू कर दिया है, जो एक सकारात्मक संकेत है। भारत की आईटी इंडस्ट्री ने पहले सर्विस सेक्टर पर ध्यान केंद्रित किया था, लेकिन अब शोध और उत्पाद विकास पर जोर दिया जा रहा है। नैसकाम और इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय ने 'फ्यूचर स्किल्स प्राइम' नामक एक राष्ट्रीय डिजिटल स्किलिंग प्लेटफार्म की शुरुआत की है, जिसमें एआई, साइबर सुरक्षा और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में कोर्स उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में नौकरियों का स्वरूप बदलेगा, लेकिन रोजगार समाप्त नहीं होंगे। डॉ. अनिल सिंह परिहार ने कहा कि शिक्षा प्रणाली को अब केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।
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भारत की शिक्षा प्रणाली में बदलाव और नए कौशलों की आवश्यकता से छात्रों और युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।
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