कृत्रिम रोशनी से स्वास्थ्य पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव: विशेषज्ञों की चेतावनी
Health: सेहत को अंधेरे में ले जा रहा कृत्रिम उजाला, बढ़ रहीं बीमारियां, विशेषज्ञों का हैरान करने वाला दावा
Amar Ujala
Image: Amar Ujala
विशेषज्ञों का कहना है कि कृत्रिम रोशनी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। इससे जैविक घड़ी प्रभावित होती है, जिससे हृदय रोग, मानसिक समस्याएं और कैंसर का खतरा बढ़ता है। सही नींद के लिए अंधेरे में सोना और डिजिटल उपकरणों से दूरी बनाना जरूरी है।
- 01कृत्रिम रोशनी से जैविक घड़ी प्रभावित होती है।
- 02हृदय रोग, अनिद्रा और अवसाद का खतरा बढ़ रहा है।
- 03मेलाटोनिन हार्मोन की कमी से कैंसर का खतरा बढ़ता है।
- 04सोने के समय कमरे को पूरी तरह अंधेरा रखना चाहिए।
- 05डिजिटल उपकरणों से दूरी बनाना आवश्यक है।
Advertisement
In-Article Ad
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कृत्रिम रोशनी स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। केजीएमयू के मनोचिकित्सक डॉ. सुजीत कुमार, हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. ऋषि सेठी और स्त्री कैंसर रोग विशेषज्ञ प्रो. निशा सिंह के अनुसार, कृत्रिम रोशनी से जैविक घड़ी प्रभावित होती है, जिससे हृदय रोग और मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं। रात के समय कृत्रिम रोशनी में रहने से मेलाटोनिन हार्मोन का स्राव कम हो जाता है, जो गहरी नींद के लिए आवश्यक है। इसके परिणामस्वरूप अनिद्रा, बेचैनी और अवसाद के मामले बढ़ रहे हैं। प्रो. ऋषि सेठी ने बताया कि रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक कृत्रिम रोशनी में रहने से हृदय रोगों का खतरा बढ़ता है। वहीं, प्रो. निशा सिंह ने बताया कि मेलाटोनिन की कमी से त्वचा कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि लोगों को सोने से पहले डिजिटल उपकरणों से दूरी बनानी चाहिए और सोते समय कमरे को पूरी तरह अंधेरा रखना चाहिए।
Advertisement
In-Article Ad
कृत्रिम रोशनी के बढ़ते उपयोग से स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं, जिससे लोगों की जीवन गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आप मानते हैं कि कृत्रिम रोशनी से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।




