फिटमेंट फैक्टर में वृद्धि से केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन पर पड़ेगा असर
फिटमेंट फैक्टर में उछाल से बदलेगा बेसिक सैलरी का गेम, सरकार पर पड़ेगा पेंशन का डबल बोझ!

Image: Ndtv
भारत में लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 69 लाख पेंशन धारक 8वें वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर में वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। यदि सरकार इसे बढ़ाती है, तो इससे सैलरी और पेंशन पर भारी बोझ पड़ेगा, जो 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
- 01कर्मचारी संगठनों ने फिटमेंट फैक्टर को 2.86 या 3.68 तक बढ़ाने की मांग की है।
- 02सरकार को बढ़ी हुई सैलरी के साथ पेंशन का अतिरिक्त खर्च संभालना चुनौतीपूर्ण होगा।
- 03फिटमेंट फैक्टर में वृद्धि से न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर 26,000 रुपये हो सकती है।
- 04एनपीएस में योगदान बढ़ने से सरकार का सालाना खर्च कई हजार करोड़ रुपये बढ़ जाएगा।
- 05यूनिफाइड पेंशन स्कीम के तहत पेंशन देनदारी भी बढ़ेगी, जिससे सरकार को अतिरिक्त वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ेगा।
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भारत में 8वें वेतन आयोग के लिए लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 69 लाख पेंशन धारक फिटमेंट फैक्टर में वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों ने इस फैक्टर को 2.86 या 3.68 तक बढ़ाने की मांग की है, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर 26,000 रुपये हो सकती है। यदि सरकार इस मांग को मानती है, तो इससे सरकार पर पेंशन और सैलरी का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जो 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। एनपीएस में योगदान बढ़ने से सरकार का सालाना खर्च कई हजार करोड़ रुपये बढ़ जाएगा। इसके अलावा, यूनिफाइड पेंशन स्कीम के तहत पेंशन देनदारी भी बढ़ेगी, जिससे सरकार को वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ेगा। इस स्थिति में सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे बढ़ी हुई सैलरी और पेंशन के खर्च को कैसे संभालेंगे।
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सरकार को बढ़ी हुई सैलरी और पेंशन के कारण वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ेगा।
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