किसानों की आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं: 14 राज्यों में चिंताजनक स्थिति
अन्नदाता पर महासंकट! 14 राज्यों में क्यों बढ़ी किसानों की खुदकुशी? पर्यावरण दिवस पर पढ़ें चौंकाने वाली रिपोर्ट
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भारत के 14 राज्यों में किसानों और कृषि मजदूरों की आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की गंभीर स्थिति उजागर हो रही है। 2019 से 2024 के बीच किसानों की आत्महत्या में 3% की वृद्धि हुई है, जिसमें कृषि मजदूरों की आत्महत्या की दर अब किसानों से अधिक है।
- 0114 राज्यों में किसानों की आत्महत्या की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसमें कृषि मजदूरों की स्थिति और भी खराब है।
- 022019 से 2024 के बीच आत्महत्याओं में 3% की वृद्धि हुई है।
- 03राजस्थान (+1,088%), मध्य प्रदेश (+82%) और कर्नाटक (+82%) में आत्महत्या की दर में सर्वाधिक वृद्धि हुई।
- 042024 में महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में कुल आत्महत्याओं का 69% हिस्सा दर्ज किया गया।
- 0556% आत्महत्या करने वाले कृषि मजदूर थे, जो पिछले पांच वर्षों में दूसरा सबसे बड़ा अनुपात है।
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हाल के आंकड़ों के अनुसार, भारत के 14 राज्यों में किसानों और कृषि मजदूरों की आत्महत्या की घटनाएं चिंताजनक रूप से बढ़ी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से 2024 के बीच किसानों की आत्महत्या में 3% की वृद्धि हुई है। विशेष रूप से, कृषि मजदूरों द्वारा आत्महत्या की दर अब किसानों से अधिक हो गई है, जो ग्रामीण भारत में बढ़ते आर्थिक दबावों का संकेत है। राजस्थान में आत्महत्या की दर में सबसे अधिक वृद्धि (+1,088%) हुई है, जबकि मध्य प्रदेश और कर्नाटक में भी यह दर 82% बढ़ी है। 2024 में, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश ने कुल आत्महत्याओं का 69% हिस्सा दर्ज किया। सरकार द्वारा किसानों और मजदूरों के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं।
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किसानों और कृषि मजदूरों की आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्थिरता को प्रभावित कर रही हैं।
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