मौत के बाद चेतना को सुरक्षित रखने की नई तकनीक: नेक्टोम का प्रयोग
मेडिकल साइंस का चमत्कार: क्या मृत्यु के बाद भी अमर रहेगी आपकी चेतना? जानें इस तकनीक के पीछे का सच

Image: Globalherald
अमेरिकी स्टार्टअप नेक्टोम ने एक सुअर के मस्तिष्क को मृत्यु के बाद सुरक्षित रखने में सफलता हासिल की है। यह तकनीक, जिसे 'कनेक्टोम' कहा जाता है, न्यूरॉन्स के नेटवर्क को संरक्षित करती है, जिससे भविष्य में अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी बीमारियों का इलाज संभव हो सकता है।
- 01नेक्टोम ने पहली बार किसी स्तनधारी के मस्तिष्क को मृत्यु के बाद सुरक्षित रखा है।
- 02यह प्रक्रिया मस्तिष्क के भीतर मौजूद न्यूरॉन्स और सिनेप्स के जाल को संरक्षित करती है।
- 03मस्तिष्क को सुरक्षित करने के लिए विशेष रसायनों का उपयोग किया गया है जो कोशिकाओं को 'लॉक' करते हैं।
- 04सुअर के मस्तिष्क को -32 डिग्री सेल्सियस पर सुरक्षित रखा गया है, जिससे यह सैकड़ों वर्षों तक संरक्षित रह सकता है।
- 05वर्तमान में, कोई तकनीक नहीं है जो सुरक्षित रखे गए मस्तिष्क से यादों या चेतना को पुनः प्राप्त कर सके।
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अमेरिकी स्टार्टअप नेक्टोम ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जिसमें उन्होंने एक सुअर के मस्तिष्क को मृत्यु के बाद सुरक्षित रखा है। यह प्रक्रिया, जिसे 'कनेक्टोम' कहा जाता है, न्यूरॉन्स के जटिल नेटवर्क को संरक्षित करती है, जो किसी व्यक्ति की यादें और चेतना को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है। वैज्ञानिकों ने सुअर की मृत्यु के 10 मिनट के भीतर उसके हृदय में एक विशेष ट्यूब डालकर रक्त को बाहर निकाला और फिर उसमें ऐसे रसायनों का प्रवाह किया, जो कोशिकाओं को उनकी मूल स्थिति में 'लॉक' कर देते हैं। इसके बाद, मस्तिष्क का तापमान -32 डिग्री सेल्सियस तक घटा दिया गया। हालांकि, यह प्रक्रिया किसी व्यक्ति को तुरंत जीवित करने का साधन नहीं है, बल्कि मस्तिष्क संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह तकनीक भविष्य में अल्जाइमर, पार्किंसन और डिमेंशिया जैसी बीमारियों के इलाज में सहायक हो सकती है।
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यह तकनीक भविष्य में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज में मदद कर सकती है, जिससे लाखों लोगों को लाभ हो सकता है।
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