हिमाचल हाईकोर्ट ने टीजीटी भर्ती याचिका खारिज की, चयन प्रक्रिया में असफलता पर उठाया सवाल
हिमाचल: चयन प्रक्रिया में फेल होने के बाद कोर्ट आना बहाना, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
Amar Ujala
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने टीजीटी भर्ती की याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें याचिकाकर्ता ने अंतिम मेरिट सूची में असफल रहने के बाद कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने कहा कि यदि उन्हें उत्तर कुंजी से आपत्ति थी, तो उन्हें पहले आना चाहिए था, और याचिका का निर्णय चयनित उम्मीदवारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता।
- 01याचिकाकर्ता ने टीजीटी भर्ती की स्क्रीनिंग परीक्षा में भाग लिया और अंतिम परिणाम में 51.46 अंक प्राप्त किए, जो कट-ऑफ से कम थे।
- 02कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को अपनी आपत्तियों के लिए जून में ही आना चाहिए था, न कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद।
- 03फाइनल आंसर की को विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रमाणित किया गया था, और याचिकाकर्ता की आपत्तियों की जांच की गई थी।
- 04याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की थी कि उनके लिए एक पद खाली रखा जाए, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया।
- 05कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह विशेषज्ञों की राय पर अपनी व्यक्तिगत राय नहीं थोप सकती।
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने टीजीटी भर्ती से संबंधित याचिका को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता ने अंतिम मेरिट सूची में असफल रहने के बाद कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जबकि उनकी परीक्षा में सामान्य वर्ग की कट-ऑफ 52 अंक थी और उन्होंने 51.46 अंक प्राप्त किए। कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता को उत्तर कुंजी से असहमत थे, तो उन्हें जून में ही आना चाहिए था, न कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद। याचिकाकर्ता ने पहले प्रोविजनल आंसर-की पर कुछ प्रश्नों पर आपत्ति जताई थी, जिसे विभाग ने स्वतंत्र विषय विशेषज्ञों के पास भेजा था। विशेषज्ञों ने प्रामाणिक किताबों के आधार पर फाइनल आंसर की जारी की। याचिकाकर्ता ने फिर लिखित परीक्षा पास की और अगले चरण में भी भाग लिया। इसके बाद, उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने मांग की कि उनके लिए एक पद खाली रखा जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि विभाग ने नियमों के अनुसार अभ्यर्थियों की आपत्तियों की जांच की थी और अदालत विशेषज्ञों की राय पर अपनी व्यक्तिगत राय नहीं थोप सकती।
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इस निर्णय का प्रभाव उन उम्मीदवारों पर पड़ता है जो पिछले 6 वर्षों से विभाग में सेवाएं दे रहे हैं और जिनकी नियुक्तियों पर याचिकाकर्ता की मांग का सीधा असर पड़ता।
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