बिहार में पत्थर खनन से निर्माण कार्यों में तेजी, बाहरी राज्यों पर निर्भरता घटेगी
बिहार के 7 जिलों में पत्थर खनन से निर्माण कार्य होंगे तेज, घटेगी बाहरी राज्यों पर निर्भरता
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बिहार के 7 जिलों में पत्थर खनन की प्रक्रिया शुरू होने से निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे झारखंड जैसे बाहरी राज्यों पर निर्भरता कम होगी। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में खनन के लिए 41 भूखंड चिह्नित किए गए हैं।
- 01बिहार के 7 जिलों में पत्थर खनन की प्रक्रिया शुरू होगी।
- 0241 भूखंड चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से 31 पर अनापत्ति मिल गई है।
- 03खनन से निर्माण सामग्री की स्थानीय उपलब्धता बढ़ेगी।
- 04झारखंड पर निर्भरता कम होगी, जिससे परियोजना लागत में कमी आएगी।
- 05कुछ भूखंडों पर पर्यावरण और ऐतिहासिक स्थलों के कारण रोक जारी रहेगी।
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बिहार के 7 जिलों में पत्थर खनन की प्रक्रिया को गति देने की योजना बनाई गई है, जिसमें गया, शेखपुरा, बांका, औरंगाबाद, नवादा, कैमूर और रोहतास शामिल हैं। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में 41 ऐसे भूखंडों की पहचान की गई है, जहां से पत्थर खनन संभव है। इनमें से 31 भूखंडों के लिए आवश्यक एनओसी प्राप्त कर ली गई है। यह कदम निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक स्टोन चिप और मेटल जैसी सामग्रियों की स्थानीय उपलब्धता को बढ़ाएगा, जिससे झारखंड जैसे बाहरी राज्यों पर निर्भरता कम होगी। हालांकि, कुछ भूखंडों पर पर्यावरण, धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के कारण खनन पर रोक जारी रहेगी। विकास आयुक्त ने निर्देश दिए हैं कि जिन भूखंडों पर आपत्ति है, उनकी जियो रेफरेंस फाइल बनाकर वन विभाग से अनुमति मांगी जाए। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और परियोजना की लागत में कमी आएगी।
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इस योजना से निर्माण कार्यों में तेजी आएगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
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