भारत की प्रभावी कूटनीति: ईरान-अमेरिका संघर्ष में राष्ट्रहित की प्राथमिकता
Iran US War: भारत को पहले से पता था? फारस की खाड़ी में सबकी बुद्धि फेल, राष्ट्रहित प्रथम वाली डिप्लोमेसी काम कर गई
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
भारत ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के दौरान अपनी कूटनीति को सफलतापूर्वक लागू किया है। भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी और संकट के समय पड़ोसी देशों की मदद की। इसके अलावा, भारत ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की योजना बनाई है, जिससे वह वैश्विक ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है।
- 01भारत ने ईरान में अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए समय पर कदम उठाए।
- 02भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता से परहेज किया, जिससे उसकी कूटनीति मजबूत हुई।
- 03भारत ने संकट के दौरान पड़ोसी देशों जैसे श्रीलंका और बांग्लादेश की सहायता की।
- 04भारत के पास वर्तमान में 78 दिनों का तेल रिजर्व है, जो संकट से निपटने में सहायक है।
- 05भारत ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के लिए नए रास्ते खोले, जैसे वेनेजुएला से तेल आयात।
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ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष में भारत ने अपनी कूटनीति को प्रभावी ढंग से लागू किया है। 28 मई, 2026 को युद्ध के तीन महीने पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन भारत ने पहले से ही अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए थे। भारत ने न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए एडवाइजरी जारी की, बल्कि कट्टर-दुश्मन देशों के माध्यम से भी उनकी मदद की। भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता से परहेज किया, जिससे उसकी स्वतंत्र कूटनीति और मजबूत हुई। इसके अलावा, भारत ने संकट के समय अपने पड़ोसी देशों जैसे श्रीलंका, बांग्लादेश, मालदीव और नेपाल की सहायता की। भारत ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के लिए नए रास्ते खोले हैं, जिससे वह वैश्विक ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। वर्तमान में, भारत के पास 78 दिनों का तेल रिजर्व है, जो उसे इस संकट से उबरने में मदद कर रहा है।
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भारत की कूटनीति ने न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान पड़ोसी देशों की सहायता भी की।
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