महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में लावारिस डिग्रियों की खोज ने उठाए गंभीर सवाल
Rohtak News: परीक्षा सदन की गैलरी और कूड़ेदान में मिलीं डिग्रियां
Amar Ujala
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महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक में परीक्षा सदन की गैलरी और डस्टबिन में लावारिस डिग्रियां और प्रमाणपत्र मिले हैं, जिनमें 1988 और 1990 के शिक्षा-स्नातक प्रमाणपत्र शामिल हैं। यह घटना विश्वविद्यालय की रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है, क्योंकि डिग्रियां छात्रों के भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं।
- 01डिग्रियां 1988 और 1990 के शिक्षा-स्नातक प्रमाणपत्रों के साथ-साथ 2017 और 2018 की कंप्यूटर अनुप्रयोग डिग्रियां भी मिलीं।
- 02डिग्रियों पर छात्रों के नाम, रोल नंबर और पंजीकरण संख्या स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी।
- 03प्रश्न उठता है कि ये डिग्रियां परीक्षा सदन में कैसे पहुंचीं और क्या रिकॉर्ड प्रबंधन में लापरवाही हुई।
- 04परीक्षा नियंत्रक प्रो. राहुल ऋषि ने बताया कि विश्वविद्यालय किसी भी छात्र की डिग्री लंबित नहीं रखता।
- 05यह घटना विश्वविद्यालय की सुरक्षा और दस्तावेज प्रबंधन प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है।
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महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू), रोहतक में परीक्षा सदन की गैलरी और पार्किंग में लावारिस हालत में डिग्रियां और प्रमाणपत्र मिले हैं। इनमें शिक्षा-स्नातक (बीएड) के प्रमाणपत्र 1988 और 1990 के साथ-साथ 2017 और 2018 की कंप्यूटर अनुप्रयोग की डिग्रियां भी शामिल हैं। ये दस्तावेज पूरी तरह से ठीक थे और छात्रों के नाम, रोल नंबर, पंजीकरण संख्या और विश्वविद्यालय की आधिकारिक मुहर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी। इस घटना ने विश्वविद्यालय की रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रश्न उठता है कि ये डिग्रियां कैसे परीक्षा सदन की गैलरी और डस्टबिन तक पहुंचीं? क्या किसी छात्र ने जानबूझकर अपनी डिग्री फाड़ी या फिर यह किसी कर्मचारी की लापरवाही का परिणाम है? परीक्षा नियंत्रक प्रो. राहुल ऋषि के अनुसार, विश्वविद्यालय किसी भी छात्र की डिग्री लंबित नहीं रखता, और सभी डिग्रियां संबंधित विभागों या कॉलेजों में भेज दी जाती हैं। यह घटना विश्वविद्यालय की सुरक्षा और दस्तावेज प्रबंधन प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती है।
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यह घटना छात्रों और उनके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा पर सवाल उठाती है।
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