भोपाल में डॉग बाइट का खतरा: सुप्रीम कोर्ट का आदेश और प्रशासन की चुनौतियाँ
करोड़ों खर्च के बाद भी भोपाल में नहीं थमा डॉग बाइट का खतरा

Image: Globalherald
भोपाल, मध्य प्रदेश में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थलों से खतरनाक कुत्तों को हटाने का आदेश दिया है। हालांकि, शहर में स्थायी शेल्टर होम की कमी और बढ़ते कुत्तों की संख्या प्रशासन के लिए चुनौती बन गई है।
- 01भोपाल नगर निगम ने पिछले पांच वर्षों में कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण पर ₹8.56 करोड़ खर्च किए हैं।
- 02हर दिन औसतन 81 डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें से 15 गंभीर शिकायतें नगर निगम के पास पहुँचती हैं।
- 03भोपाल में लगभग 1 लाख 20 हजार आवारा कुत्ते सड़कों पर घूम रहे हैं, जबकि नगर निगम के पास केवल 600 कुत्तों को रखने की क्षमता है।
- 04नगर निगम ने 810 स्थानों को 'नो डॉग जोन' के रूप में चिन्हित किया है, जिसमें स्कूल, कॉलेज और बस स्टैंड शामिल हैं।
- 05सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम को आवारा कुत्तों के खतरे से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
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भोपाल, मध्य प्रदेश में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं, जिससे नागरिकों में चिंता का माहौल बना हुआ है। उच्चतम न्यायालय ने 19 मई को आदेश दिया कि सार्वजनिक स्थानों से खतरनाक कुत्तों को तुरंत हटाया जाए। हालांकि, इस आदेश को लागू करना प्रशासन के लिए मुश्किल साबित हो रहा है, क्योंकि शहर में कुत्तों को रखने के लिए कोई स्थायी शेल्टर होम मौजूद नहीं है। पिछले पांच वर्षों में कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण पर ₹8.56 करोड़ खर्च किए जाने के बावजूद, हर दिन औसतन 81 डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं। इनमें से लगभग 15 गंभीर शिकायतें नगर निगम के पास पहुँचती हैं। वर्तमान में, भोपाल में लगभग 1 लाख 20 हजार आवारा कुत्ते हैं, जबकि नगर निगम के पास केवल 600 कुत्तों को रखने की क्षमता है। नगर निगम ने 810 स्थानों को 'नो डॉग जोन' के रूप में चिन्हित किया है, लेकिन आवारा कुत्तों की संख्या और प्रशासन की सीमित व्यवस्थाएँ एक बड़ी चुनौती बन गई हैं। अब देखना यह है कि नगर निगम इस नए आदेश के बाद आवारा कुत्तों के खतरे को कम करने के लिए क्या कदम उठाता है।
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आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं से नागरिकों की सुरक्षा को खतरा है, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए।
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