टाटा ट्रस्ट पर 100 साल में पहली बार शेयरों के गलत ट्रांसफर का आरोप
100 साल में पहली बार टाटा पर लगा ऐसा आरोप! क्या है 833 शेयरों से जुड़ा मामला जिसने 37 साल बाद उठाया सिर
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टाटा ट्रस्ट पर 1989 में 833 शेयरों के गलत ट्रांसफर का आरोप लगाया गया है, जिसमें शेयरों का मूल्य शून्य दिखाने और ट्रस्टी की अनुमति न लेने का आरोप शामिल है। ट्रस्ट ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है और कानूनी कार्रवाई की तैयारी की है।
- 01नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट ने 1989 में नवल एच टाटा को 833 शेयर ट्रांसफर किए थे।
- 02आरोप है कि शेयरों का मूल्य शून्य दिखाया गया, जबकि उनकी वास्तविक कीमत 90,000 से 1,00,000 रुपये प्रति शेयर थी।
- 03ट्रस्ट ने कहा है कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था और आरोप बेबुनियाद हैं।
- 04शेयर ट्रांसफर के एक हफ्ते पहले नवल टाटा ने ट्रस्टी पद से इस्तीफा दिया था।
- 05शिकायतकर्ताओं ने ट्रस्ट को हुए नुकसान की भरपाई और जांच की मांग की है।
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टाटा ट्रस्ट पर 100 साल में पहली बार आरोप लगा है कि 1989 में 833 शेयरों का गलत तरीके से ट्रांसफर किया गया। आरोप लगाने वाले ने दावा किया है कि इस ट्रांसफर में ट्रस्टी की अनुमति नहीं ली गई और शेयरों के मूल्य को शून्य दिखाया गया, जबकि उनकी वास्तविक कीमत 90,000 से 1,00,000 रुपये प्रति शेयर थी। यह मामला तब उठाया गया जब रतन टाटा के निधन के बाद ट्रस्ट में आंतरिक विवाद बढ़ गए। शिकायतकर्ता सूरेश पटिलखेड़े और सुनील तुलसीराम पटिलखेड़े ने इस ट्रांसफर को चुनौती दी है। ट्रस्ट ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कानूनी कार्रवाई की तैयारी की है। ट्रस्ट का कहना है कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था और नानी ए पालखीवाला जैसे विशेषज्ञों से अनुमोदन लिया गया था।
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इस विवाद का असर टाटा ट्रस्ट की छवि और उसके संचालन पर पड़ सकता है।
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