ईरान संकट से भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर, सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों को दी 1.23 लाख करोड़ की मदद
ईरान संकट: तेल-खाद के बढ़ते बिल ने बढ़ाई सरकार की टेंशन, पेट्रोलियम कंपनियों को दी 1.23 लाख करोड़ की मदद
Amar Ujala
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ईरान संकट के कारण भारत में ईंधन और उर्वरक का आयात बिल बढ़ा है। सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों को कीमतें स्थिर रखने के लिए 1.23 लाख करोड़ रुपये की मदद दी है। उर्वरक मंत्रालय ने सब्सिडी 100% बढ़ाने की मांग की है।
- 01ईरान संकट के चलते भारत में ईंधन और उर्वरक का आयात बिल बढ़ा है।
- 02सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों को 1.23 लाख करोड़ रुपये की मदद दी है।
- 03उर्वरक मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष के लिए सब्सिडी 100% बढ़ाने की मांग की है।
- 04सरकार का राजकोषीय घाटा 4.3% पर स्थिर है।
- 05विनिवेश के तहत 80,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है।
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ईरान संकट के चलते भारत की अर्थव्यवस्था को ईंधन और उर्वरक के बढ़ते आयात बिल के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, उर्वरक मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सब्सिडी 100% बढ़ाने की मांग की है। इस साल के बजट में 1.77 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी का अनुमान लगाया गया है। संकट के कारण 78 दिनों तक पेट्रोल पंप पर कीमतें स्थिर रखने के लिए सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों को 1.23 लाख करोड़ रुपये की मदद दी, लेकिन इसके बाद कंपनियों ने धीरे-धीरे कीमतें बढ़ाना शुरू कर दिया है। इसके बावजूद, कंपनियों को हर दिन 650 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। हालाँकि, आर्थिक वृद्धि की रफ्तार बनी हुई है और जीएसटी के आंकड़े सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। सरकार को फिलहाल अतिरिक्त कर्ज लेने की आवश्यकता नहीं है, और विनिवेश के तहत 80,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना भी चल रही है।
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ईंधन और उर्वरक की बढ़ती लागत से किसानों और आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
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