प्रियांशु श्रीवास्तव की आत्महत्या: पिता के अपमान और मानसिक दबाव का मामला
UP: ‘पापा मेरे शव को हाथ न लगाएं’, कड़वी यादों और अपमान ने छीनीं प्रियांशु की सांसें, दो पन्नों में लिखा दर्द
Amar Ujala
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प्रियांशु श्रीवास्तव, 24 वर्षीय प्रशिक्षु अधिवक्ता, ने अपने पिता के अपमान और मानसिक दबाव के कारण आत्महत्या कर ली। उसने एक सुसाइड नोट में अपने पिता पर आरोप लगाते हुए लिखा कि वह इस तरह के जीवन को सहन नहीं कर सकता। यह घटना कानपुर, उत्तर प्रदेश, भारत में हुई।
- 01प्रियांशु ने अपने पिता पर मानसिक और शारीरिक अपमान का आरोप लगाया।
- 02उसने सुसाइड नोट में अपने पिता को शव छूने से मना किया।
- 03यह घटना कानपुर में न्यायालय भवन की पांचवीं मंजिल से कूदकर हुई।
- 04पिछले छह महीनों में न्यायालय में आत्महत्या की यह दूसरी घटना है।
- 05प्रियांशु ने अपने परिवार को प्यार देने की बात भी लिखी थी।
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प्रियांशु श्रीवास्तव, जो कानपुर, उत्तर प्रदेश में एक प्रशिक्षु अधिवक्ता था, ने अपने पिता के निरंतर अपमान और मानसिक दबाव के कारण आत्महत्या कर ली। उसने एक सुसाइड नोट में लिखा कि उसके पिता ने उसे हमेशा बेइज्जत किया और उसे जीने की इच्छा खत्म हो गई। प्रियांशु ने अपने पिता पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह उसे अपने जीवन में जरूरत से ज्यादा दखल देते थे। उसने अपने सुसाइड नोट में यह भी लिखा कि वह अपने पिता को शव छूने से मना करता है। यह घटना न्यायालय भवन की पांचवीं मंजिल से कूदकर हुई और प्रियांशु को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह घटना पिछले छह महीनों में न्यायालय में आत्महत्या की दूसरी घटना है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक दबाव के मुद्दे गंभीर हैं।
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यह घटना मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों और पारिवारिक दबाव पर चर्चा को बढ़ावा दे सकती है।
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