ईरान को चीन से सैन्य समर्थन की संभावना पर अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान
ईरान को चीन से सैन्य समर्थन? अभी तक कोई सबूत नहीं मिला

Image: Globalherald
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि चीन ने ईरान को किसी भी प्रकार का सैन्य समर्थन नहीं दिया है। उन्होंने चीन से अपील की है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में शामिल हो। यह स्थिति भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
- 01मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका को चीन द्वारा ईरान को सैन्य सहायता देने का कोई सबूत नहीं मिला है।
- 02रुबियो ने चीन से अपील की कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए समर्थन करे।
- 03ईरान के पास चीन में बने कुछ सैन्य उपकरण हैं, लेकिन हालिया संघर्ष में चीन की कोई गतिविधि नहीं देखी गई।
- 04चीन की अर्थव्यवस्था पर समुद्री संकट का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, यदि ईरान के कारण जलडमरूमध्य में रुकावट बनी रहती है।
- 05भारत और चीन दोनों ही खाड़ी देशों से कच्चे तेल के बड़े खरीदार हैं, जिससे इस स्थिति का भारत के आर्थिक बजट पर असर पड़ सकता है।
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 'हाउस एप्रोप्रियेशन्स सबकमेटी' की सुनवाई में कहा कि अमेरिका को ईरान को चीन द्वारा सैन्य सहायता देने का कोई सबूत नहीं मिला है। उन्होंने चीन से अपील की कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करे। रुबियो ने यह भी बताया कि चीन ने ईरान को कोई सैन्य सहायता नहीं दी है और न ही अमेरिकी अभियानों में कोई रुकावट पैदा की है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि ईरान के पास चीन में बने कुछ सैन्य उपकरण हैं। रुबियो ने चीन की भूमिका को 'सावधानीपूर्ण' बताया और कहा कि चीन ने ईरान के साथ अपनी दोस्ती के बावजूद इस संघर्ष में सीधे तौर पर भाग नहीं लिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान के कारण जलडमरूमध्य में रुकावट बनी रहती है, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान चीन को होगा, जो वैश्विक व्यापार और कच्चे तेल की सप्लाई पर निर्भर है। यह स्थिति भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
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यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है, तो इससे कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जो भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
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