जम्मू-कश्मीर में लड़कियों की शिक्षा में गिरावट, हायर सेकेंडरी में केवल 46.6% पहुंचती हैं
सरकारी दावों के बीच कड़वी हकीकत, J&K में हायर सेकेंडरी तक पहुंचती हैं सिर्फ 46.6% बेटियां; तेजी से बढ़ रहा ड्रापआउट
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जम्मू-कश्मीर में लड़कियों की शिक्षा की स्थिति चिंताजनक है, जहां हायर सेकेंडरी स्तर पर केवल 46.6% लड़कियां पहुंचती हैं। सरकारी दावों के बावजूद, राज्य में सामाजिक और आर्थिक बाधाओं के कारण ड्रापआउट दर तेजी से बढ़ रही है।
- 01जम्मू-कश्मीर में हायर सेकेंडरी स्तर पर लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात केवल 46.6% है।
- 02प्राइमरी से हायर सेकेंडरी तक लड़कियों का नामांकन राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।
- 03दूरदराज इलाकों में स्कूलों की कमी और आर्थिक दबाव प्रमुख बाधाएं हैं।
- 04विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार को सुरक्षित परिवहन और छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए।
- 05ड्रापआउट दर में वृद्धि से भविष्य की शिक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
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जम्मू-कश्मीर में लड़कियों की शिक्षा की स्थिति गंभीर है, जहां हायर सेकेंडरी स्तर पर केवल 46.6% लड़कियां पहुंचती हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्राइमरी से लेकर हायर सेकेंडरी स्तर तक लड़कियों का नामांकन राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। विशेष रूप से, अप्पर प्राइमरी स्तर पर यह 80% और सेकेंडरी स्तर पर 67.5% है, जो राष्ट्रीय औसत से नीचे है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लड़कियों की शिक्षा में गिरावट के पीछे सामाजिक और आर्थिक बाधाएं मुख्य कारण हैं। जल्दी विवाह, घरेलू जिम्मेदारियां, और सुरक्षित परिवहन की कमी जैसी समस्याएं लड़कियों की पढ़ाई में रुकावट डाल रही हैं। यदि जम्मू-कश्मीर को महिला शिक्षा में सुधार करना है, तो सरकार को केवल नामांकन बढ़ाने के बजाय सुरक्षित परिवहन, विशेष छात्रवृत्तियों और डिजिटल शिक्षा सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
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यदि लड़कियों की शिक्षा में सुधार नहीं होता है, तो भविष्य में उनकी रोजगार संभावनाएं और सामाजिक स्थिति प्रभावित हो सकती हैं।
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