चीन की नई तकनीक से रेगिस्तान में उगाई जा रही हरियाली
रेत के समंदर में चीन ने बिछाया हरी घास का कालीन! जानिए उस 'रहस्यमयी' बैक्टीरिया का सच जिसने सबको चौंकाया
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चीन के वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है जो बंजर रेगिस्तानी रेत को केवल 10 महीनों में उपजाऊ मिट्टी में बदल सकती है। इसमें सायनोबैक्टीरिया का उपयोग किया गया है, जो मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करते हैं और पौधों के विकास को बढ़ावा देते हैं।
- 01चीन के शापोतौ डेजर्ट एक्सपेरिमेंटल रिसर्च स्टेशन में विकसित तकनीक से रेगिस्तानी रेत को उपजाऊ मिट्टी में बदला जा सकता है।
- 02सायनोबैक्टीरिया प्राकृतिक रूप से मिट्टी को मजबूत करते हैं और पौधों के विकास में मदद करते हैं।
- 03इस प्रक्रिया में ऑर्गेनिक कार्बन का संचय तीन गुना और नाइट्रोजन का 15 गुना तक बढ़ सकता है।
- 04बायोलॉजिकल सॉइल क्रस्ट मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करते हैं।
- 05यह तकनीक जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में मददगार साबित हो सकती है।
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चीन के वैज्ञानिकों ने रेगिस्तानी रेत को उपजाऊ मिट्टी में बदलने के लिए एक नई तकनीक विकसित की है, जो केवल 10 महीनों में प्रभावी होती है। यह शोध शापोतौ डेजर्ट एक्सपेरिमेंटल रिसर्च स्टेशन में किया गया है, जहां सायनोबैक्टीरिया का उपयोग किया गया है। ये सूक्ष्मजीव मिट्टी को मजबूत बनाते हैं और पौधों के विकास में सहायता करते हैं। सायनोबैक्टीरिया की मदद से मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन का संचय तीन गुना और नाइट्रोजन की मात्रा 15 गुना तक बढ़ सकती है। इस तकनीक को बायोलॉजिकल सॉइल क्रस्ट के रूप में जाना जाता है, जो मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार और पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने में मदद करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक दुनिया के अन्य शुष्क क्षेत्रों में भी लागू की जा सकती है, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी।
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इस तकनीक से रेगिस्तानी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
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