FPIs की शेयर बिक्री और डेट बाजार में निवेश: भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
FPIs बेच रहे हैं शेयर, खरीद रहे हैं बॉन्ड; भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्या हैं इसके मायने?
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इस वर्ष विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार से 2.67 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं, जबकि डेट बाजार में उनका निवेश महत्वपूर्ण बना हुआ है। यह निवेश रुपये को स्थिरता देने और चालू खाते के घाटे को भरने में मदद कर सकता है।
- 01इस वर्ष FPIs ने भारतीय शेयरों से 43,000 करोड़ रुपये निकाले हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है।
- 021999 से अब तक FPIs ने भारत के डेट बाजार में 95.5 अरब डॉलर का निवेश किया है।
- 03Debt-FAR के जरिए 2025 में 19.3 अरब डॉलर का डेट निवेश हुआ, जिसमें से 11.8 अरब डॉलर केवल FAR रूट से आया।
- 04FPIs का डेट निवेश भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, खासकर जब इक्विटी निवेश कमजोर हो।
- 05आर्थिक स्थिरता के लिए FPIs का डेट निवेश चालू खाते के घाटे को भरने में मदद कर सकता है।
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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार से इस वर्ष 2.67 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ी है। हालांकि, FPIs का डेट बाजार में निवेश महत्वपूर्ण बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, 1999 से अब तक FPIs ने भारत में डेट बाजार में 95.5 अरब डॉलर का निवेश किया है। हाल के वर्षों में, Debt-FAR के माध्यम से डेट निवेश में वृद्धि हुई है, जिसमें 2025 में 19.3 अरब डॉलर का निवेश हुआ। FPIs का डेट निवेश रुपये को स्थिरता देने और चालू खाते के घाटे को भरने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, जब इक्विटी निवेश कमजोर होता है, तब डेट निवेश अर्थव्यवस्था को सहारा देने का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि FPIs का डेट निवेश पॉजिटिव रियल यील्ड, मुद्रा की स्थिरता, और आसान मार्केट एक्सेस से प्रभावित होता है।
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FPIs का डेट निवेश रुपये को स्थिरता देने में मदद कर सकता है, जिससे आर्थिक स्थिरता बढ़ेगी।
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