दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश: जमानत मिलने के बाद कैदियों की रिहाई में तेजी लाने के लिए आधार कार्ड का QR कोड स्कैनिंग अनिवार्य
जमानत मिलने के बाद भी अब जेल में नहीं रहेंगे कैदी! दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश, वेरिफिकेशन के लिए अपनाएं यह तरीका

Image: Zee News
दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत मिलने के बाद कैदियों की रिहाई में देरी को समाप्त करने के लिए आदेश दिया है। अब जेल सुपरिटेंडेंट आधार कार्ड के QR कोड स्कैन करके पहचान की पुष्टि करेंगे, जिससे रिहाई की प्रक्रिया तेज होगी।
- 01दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत मिलने के बावजूद कैदियों की रिहाई में औसतन 1-2 सप्ताह की देरी पर चिंता जताई।
- 02कुछ मामलों में कैदियों की रिहाई जमानत मिलने के बाद 33 से 56 दिन तक ले गई।
- 03अब पहचान की पुष्टि के लिए आधार कार्ड का QR कोड स्कैन किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया में तेजी आएगी।
- 04जमानत के लिए आवश्यक दस्तावेजों की जांच ईमेल के माध्यम से की जाएगी, जिससे समय की बचत होगी।
- 05यह आदेश जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस अमित महाजन की बेंच द्वारा दिया गया है।
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दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत मिलने के बावजूद कैदियों की रिहाई में हो रही देरी को समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सभी जेलों के सुपरिटेंडेंट अब आधार कार्ड के QR कोड को स्कैन करके कैदियों और जमानतदारों की पहचान की पुष्टि करेंगे। इससे जमानत मिलने के बाद कैदियों की रिहाई में हो रही औसतन 1-2 सप्ताह की देरी को कम किया जा सकेगा। कोर्ट ने इस साल फरवरी से 15 फरवरी तक के जेलों के डेटा का अध्ययन करने के बाद यह निर्णय लिया, जिसमें पाया गया कि कई मामलों में रिहाई में 33 से 56 दिन लग गए। पहले पहचान और वित्तीय दस्तावेजों की जांच के लिए पुलिस को व्यक्तिगत रूप से जाना पड़ता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया ईमेल के माध्यम से की जाएगी, जिससे समय की बचत होगी।
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इस आदेश से दिल्ली की जेलों में कैदियों की रिहाई की प्रक्रिया में तेजी आएगी, जिससे कैदियों को जमानत मिलने के बाद लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
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