गंगा सप्तमी 2026: पूजा विधि और महत्व
Ganga Saptami 2026: आज है गंगा सप्तमी, जानें अमृतवाहिनी मां गंगा की पूजा विधि और महाउपाय
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गंगा सप्तमी, जो 23 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी, मां गंगा के अवतरण से जुड़ा पर्व है। इस दिन गंगा स्नान और पूजा का विशेष महत्व है। इस अवसर पर गंगा जी की पूजा विधि और पौराणिक कथाओं का वर्णन किया गया है।
- 01गंगा सप्तमी 23 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।
- 02इस दिन गंगा स्नान और पूजा का विशेष महत्व है।
- 03मां गंगा के अवतरण से जुड़ी पौराणिक कथाएं हैं।
- 04गंगा पूजन के लिए शुभ मुहूर्त प्रात: 11:01 से दोपहर 01:38 बजे तक है।
- 05आरती पूजा सभी दोषों को दूर करती है।
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गंगा सप्तमी, जो वैशाख मास के शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है, मां गंगा के पापनाशिनी और पुण्यदायिनी स्वरूप के अवतरण से जुड़ी है। इस वर्ष, गंगा सप्तमी 23 अप्रैल 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है, और पूजा का शुभ मुहूर्त प्रात: 11:01 से दोपहर 01:38 बजे तक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां गंगा का प्राकट्य भगवान विष्णु के अंगूठे से हुआ था। राजा भगीरथ की प्रार्थना पर मां गंगा ने महादेव की जटाओं से निकलकर अपने पुरखों को मुक्ति दिलाने के लिए धरती पर अवतरित हुईं। गंगा जी की पूजा के दौरान, श्रद्धालुओं को स्नान करने के बाद गंगा जी की प्रतिमा पर रोली, चंदन, पुष्प, और फल अर्पित करना चाहिए। पूजा के अंत में गंगा जी की आरती करना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पूजा की सभी कमियों को दूर करती है।
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गंगा सप्तमी पर गंगा स्नान और पूजा से श्रद्धालुओं को धार्मिक लाभ और पुण्य की प्राप्ति होती है।
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