HMT घड़ियों का उत्थान और पतन: टाटा की एंट्री ने बदला खेल
कभी दहेज में मांगी जाती थी ये घड़ी, जवाहरलाल नेहरू ने खुद की थी लॉन्च; TATA ने 350 इंजीनियर से ऐसे बिगाड़ा खेल

Image: Jagran
HMT घड़ियों ने 70-80 के दशक में भारतीय बाजार में प्रमुखता हासिल की, लेकिन टाटा के Titan ब्रांड की एंट्री और तकनीकी बदलावों के कारण यह कंपनी धीरे-धीरे बाजार से गायब हो गई। 2016 में भारत सरकार ने HMT के घड़ी डिवीजन को बंद कर दिया।
- 01HMT की स्थापना 1953 में भारत सरकार द्वारा की गई थी और इसकी पहली घड़ी 1961 में लॉन्च हुई थी।
- 02HMT ने 1991 में 70 लाख घड़ियों का उत्पादन किया और अपने जीवनकाल में 11 करोड़ से अधिक घड़ियां बेचीं।
- 031984-85 में टाटा ने Titan ब्रांड के साथ बाजार में एंट्री की, जिसने HMT के लिए चुनौती पेश की।
- 04HMT की धीमी निर्णय लेने की प्रक्रिया और तकनीकी बदलावों में असफलता ने इसके पतन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- 052016 में भारत सरकार ने HMT के घड़ी डिवीजन को बंद कर दिया और कर्मचारियों को वीआरएस दिया।
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HMT घड़ियों का भारतीय बाजार में एक समय पर जबरदस्त दबदबा था, विशेषकर 70 और 80 के दशक में। HMT (हिन्दुस्तान मशीन टूल्स) की स्थापना 1953 में भारत सरकार द्वारा की गई थी, और इसकी पहली घड़ी 1961 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा लॉन्च की गई थी। HMT घड़ियों को किफायती और मजबूत माना जाता था, जो शादी और अन्य अवसरों पर उपहार में दी जाती थीं। हालांकि, 1984-85 में टाटा ग्रुप द्वारा Titan ब्रांड की एंट्री ने HMT के लिए मुश्किलें पैदा कीं। टाटा ने घड़ियों को एक फैशन उत्पाद के रूप में पेश किया, जबकि HMT अपनी पुरानी मैकेनिकल तकनीक पर अड़ी रही। 1986 में HMT के 350 इंजीनियर टाइटन में शामिल हो गए, जिससे कंपनी को बड़ा झटका लगा। 1994 से HMT घाटे में जाने लगी और अंततः 2016 में भारत सरकार ने इसके घड़ी डिवीजन को बंद कर दिया।
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HMT घड़ियों के बंद होने से कई कर्मचारियों की नौकरी चली गई और भारतीय घड़ी उद्योग में एक महत्वपूर्ण ब्रांड का अंत हुआ।
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