दिल्ली में थैलेसीमिया मेजर प्रभावित बच्चों के जन्म को रोकने के लिए नया कानून
दिल्ली में थैलेसीमिया मेजर प्रभावित बच्चों का जन्म रोकने के लिए सरकार का कदम, गर्भवती की जांच अनिवार्य; बनेगा कानून
Jagran-1778261311242.webp&w=1200&q=75)
Image: Jagran
दिल्ली सरकार गर्भवती महिलाओं के लिए थैलेसीमिया की जांच अनिवार्य करने जा रही है, जिससे थैलेसीमिया मेजर से प्रभावित बच्चों के जन्म को रोका जा सके। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इस संबंध में विधेयक लाने की घोषणा की है।
- 01गर्भवती महिलाओं के लिए थैलेसीमिया की जांच अनिवार्य होगी।
- 02हर साल 12,000 से 15,000 थैलेसीमिया मेजर प्रभावित बच्चे पैदा होते हैं।
- 03एक थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे के उपचार पर प्रति वर्ष 50,000 से 2 लाख रुपये तक खर्च आता है।
- 04यदि दोनों माता-पिता वाहक हों, तो 25% संभावना होती है कि बच्चा प्रभावित होगा।
- 05इस पहल का उद्देश्य जन जागरूकता बढ़ाना और थैलेसीमिया के मामलों को कम करना है।
Advertisement
In-Article Ad
दिल्ली में थैलेसीमिया मेजर से प्रभावित बच्चों के जन्म को रोकने के लिए सरकार ने गर्भवती महिलाओं की थैलेसीमिया जांच अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि इस संबंध में एक विधेयक लाया जाएगा। भारत में लगभग 5 करोड़ लोग थैलेसीमिया ट्रेट के वाहक हैं और हर साल 12,000 से 15,000 थैलेसीमिया मेजर से प्रभावित बच्चे जन्म लेते हैं। यदि पति-पत्नी दोनों वाहक हैं, तो प्रत्येक गर्भावस्था में 25% संभावना होती है कि बच्चा थैलेसीमिया से प्रभावित होगा। थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे के उपचार पर प्रति वर्ष 50,000 से 2 लाख रुपये तक खर्च आता है। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि गर्भधारण से पहले जांच और प्रसव पूर्व परीक्षण के माध्यम से इन बच्चों के जन्म को रोका जा सकता है।
Advertisement
In-Article Ad
इस पहल से गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच में सुधार होगा, जिससे थैलेसीमिया मेजर से प्रभावित बच्चों के जन्म की संभावना कम होगी।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि गर्भवती महिलाओं की थैलेसीमिया जांच अनिवार्य करना सही है?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।



-1778261229919.webp&w=1200&q=75)
