मतगणना में अधिकारियों की नियुक्ति और काउंटिंग टेबल की प्रक्रिया
मतगणना में ऐसे होती है अफसरों की नियुक्ति, जानें 'काउंटिंग टेबल' का पूरा सिस्टम
Aaj Tak
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भारत में चुनावों के दौरान मतगणना के लिए अधिकारियों की नियुक्ति एक संवेदनशील मुद्दा है। निर्वाचन आयोग ने काउंटिंग टेबल पर चार अधिकारियों की टीम की व्यवस्था की है, जिसमें एक मतगणना पर्यवेक्षक और एक अतिरिक्त पर्यवेक्षक शामिल हैं। यह प्रक्रिया पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों पर की जाती है।
- 01मतगणना के लिए चार अधिकारियों की टीम होती है।
- 02काउंटिंग टेबल पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त होती है।
- 03अधिकारियों का चयन रैंडम आधार पर किया जाता है।
- 04काउंटिंग सेंटर में मोबाइल फोन लाने पर प्रतिबंध है।
- 05निर्वाचन आयोग ने प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कई उपाय किए हैं।
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भारत में चुनावों के दौरान मतगणना की प्रक्रिया में काउंटिंग टेबल पर बैठने वाले अधिकारियों की नियुक्ति एक महत्वपूर्ण विषय है। निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्ति होती है, और काउंटिंग टेबल पर चार सदस्यों की टीम होती है। इस टीम में एक मतगणना ऑब्जर्वर, एक अतिरिक्त ऑब्जर्वर, एक माइक्रो ऑब्जर्वर और एक चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी शामिल होता है। इन अधिकारियों का चयन पोलिंग अधिकारियों के पूल से रैंडम आधार पर किया जाता है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होती है। काउंटिंग सेंटर में सुरक्षा के लिए तीन स्तरीय व्यवस्था लागू होती है और मोबाइल फोन लाने पर पूरी तरह से रोक होती है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि केवल अधिकृत व्यक्ति ही काउंटिंग स्थल पर उपस्थित रहें। इस प्रकार, निर्वाचन आयोग ने मतगणना की प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
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मतगणना की प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने से मतदाताओं का विश्वास बढ़ता है।
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