जम्मू-कश्मीर में पेरेंट्स एसोसिएशन के गठन में धांधली की शिकायतें
FFRC का आदेश कागजों तक सीमित, अभिभावकों को खबर तक नहीं, स्कूलों ने बंद कमरे में बना दी 'पेरेंट्स एसोसिएशन'
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जम्मू-कश्मीर में फीस निर्धारण समिति (एफएफआरसी) के आदेश के बावजूद निजी स्कूलों में पेरेंट्स एसोसिएशन का गठन सही तरीके से नहीं हो रहा है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने अपने करीबी लोगों को शामिल कर इस प्रक्रिया को औपचारिकता तक सीमित कर दिया है, जिससे फीस वृद्धि पर कोई रोक नहीं लग रही।
- 01एफएफआरसी ने पेरेंट्स एसोसिएशन का गठन अनिवार्य किया था।
- 02स्कूल प्रबंधन ने अपने करीबी अभिभावकों को शामिल कर प्रक्रिया को प्रभावित किया।
- 03अभिभावकों को एसोसिएशन के गठन की जानकारी नहीं दी गई।
- 04फीस वृद्धि पर अभिभावकों की आवाज उठाने का उद्देश्य समाप्त होता दिखाई दे रहा है।
- 05अभिभावकों ने सरकार से कार्रवाई की मांग की है।
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जम्मू-कश्मीर में निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए फीस निर्धारण समिति (एफएफआरसी) ने पेरेंट्स एसोसिएशन का गठन अनिवार्य किया था। हालांकि, कई स्कूलों में इस एसोसिएशन का गठन नहीं हुआ है या फिर इसे केवल चुनिंदा अभिभावकों तक सीमित रखा गया है। अभिभावकों का कहना है कि उन्हें इस प्रक्रिया की जानकारी नहीं दी गई और स्कूल प्रबंधन ने अपने पसंदीदा अभिभावकों को शामिल कर इस प्रक्रिया को औपचारिकता बना दिया है। इस स्थिति के कारण अभिभावकों को फीस वृद्धि के मुद्दे पर अपनी आवाज उठाने का मौका नहीं मिल रहा है। अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और एसोसिएशन को वास्तविक रूप से अभिभावकों की आवाज बनाना चाहिए। इसके लिए पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया, नियमित बैठकें और स्कूल प्रबंधन से स्वतंत्रता की आवश्यकता है।
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यह स्थिति आर्थिक रूप से मध्यम वर्गीय परिवारों पर भारी पड़ रही है, जिससे बच्चों की पढ़ाई जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
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