माउंट एवरेस्ट के डेथ जोन में चढ़ाई: जानें क्यों है यह इतना खतरनाक
माउंट एवरेस्ट का वो 'डेथ जोन', जहां शरीर हो जाता है 'शटडाउन,' मौत से बचने के लिए एक-एक सांस के लिए होती है लड़ाई
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माउंट एवरेस्ट का डेथ जोन, 8,000 मीटर से ऊपर का क्षेत्र, पर्वतारोहियों के लिए अत्यंत खतरनाक है। यहां ऑक्सीजन की कमी और हाइपोक्सिया के कारण कई पर्वतारोही अपनी जान गंवा चुके हैं। 2026 में इस क्षेत्र में कम से कम 5 पर्वतारोहियों की मौत हुई, जिनमें 2 भारतीय भी शामिल हैं।
- 01माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8,849 मीटर है, और इसे दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माना जाता है।
- 02डेथ जोन में ऑक्सीजन की कमी के कारण 340 से अधिक पर्वतारोहियों की मौत हो चुकी है।
- 03हाइपोक्सिया स्थिति में ऑक्सीजन का स्तर इतना कम हो जाता है कि यह शरीर के अंगों तक नहीं पहुंच पाता।
- 04पर्वतारोहियों की अधिकतर मौतें शिखर पर पहुंचने के बाद उतरते समय होती हैं, जब थकान और ऑक्सीजन की कमी चरम पर होती है।
- 05अधिकतर पर्वतारोही मानसिक और शारीरिक कमजोरी के कारण घातक गलतियां करते हैं, जिससे उनकी जान को खतरा होता है।
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माउंट एवरेस्ट, जो नेपाल में स्थित है, विश्व की सबसे ऊँची चोटी है, जिसकी ऊँचाई 8,849 मीटर है। इस चोटी का डेथ जोन, जो 8,000 मीटर से ऊपर का क्षेत्र है, पर्वतारोहियों के लिए बेहद खतरनाक है। यहां ऑक्सीजन की कमी के कारण इंसान का शरीर काम करना बंद कर देता है, जिससे हाइपोक्सिया जैसी स्थिति उत्पन्न होती है। इस साल, 2026 में, इस क्षेत्र में कम से कम 5 पर्वतारोहियों की मौत हुई, जिनमें 2 भारतीय भी शामिल थे। पर्वतारोहियों की अधिकतर मौतें शिखर पर पहुंचने के बाद उतरते समय होती हैं, जब थकान और ऑक्सीजन की कमी चरम पर होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक और शारीरिक कमजोरी के कारण कई पर्वतारोही घातक गलतियां करते हैं, जिससे उनकी जान को खतरा होता है। इसके बावजूद, माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए लोगों की संख्या में कमी नहीं आई है।
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माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई पर बढ़ती मौतों की संख्या पर्वतारोहियों और उनके परिवारों के लिए चिंता का विषय है।
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