टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का आंदोलन, संसद से कानून बनाने की मांग
यूपी में TET अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का मोर्चा, संसद से कानून बनाने की मांग; बड़े आंदोलन की भी दी चेतावनी
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Image: Jagran
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य करने के मुद्दे पर शिक्षकों ने विरोध तेज किया है। लखनऊ में बैठक में शिक्षकों ने संसद से कानून बनाने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि राहत नहीं मिली, तो 10 लाख शिक्षक अनिश्चितकालीन आंदोलन करेंगे।
- 01शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के अनिवार्य होने पर शिक्षकों की नौकरी पर संकट हो सकता है।
- 02लगभग 1.86 लाख शिक्षकों के शामिल होने का दावा किया गया है।
- 03यदि केंद्र सरकार ने राहत नहीं दी, तो 10 लाख शिक्षक दिल्ली में अनिश्चितकालीन आंदोलन करेंगे।
- 04शिक्षकों के संगठनों ने एकजुट होकर आंदोलन की तैयारी करने का निर्णय लिया है।
- 05एनसीटीई के आदेश ने शिक्षकों की योग्यता पर सवाल उठाया है।
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लखनऊ में आल इंडिया बीटीसी शिक्षक संघ की बैठक में शिक्षकों ने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को अनिवार्य करने के खिलाफ आवाज उठाई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षकों की नौकरी को खतरे में डालने वाले इस मुद्दे पर शिक्षकों ने केंद्र सरकार से संसद के मानसून सत्र में कानून बनाने की मांग की। संघ के नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने इस मुद्दे पर राहत नहीं दी, तो देशभर के लगभग 10 लाख शिक्षक दिल्ली में अनिश्चितकालीन आंदोलन करेंगे। इसमें प्रदेश के 1.86 लाख शिक्षकों के शामिल होने की संभावना है। शिक्षकों ने कहा कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की नौकरी को बचाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा। इसके अलावा, एनसीटीई के आदेश ने शिक्षकों की योग्यता पर सवाल खड़ा कर दिया है, जिससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है।
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यदि टीईटी अनिवार्यता लागू होती है, तो 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों की नौकरी पर संकट आ सकता है।
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