भारत में दलबदल का इतिहास: 1967-71 के दौरान 45 सरकारों का गिरना
जब चार साल के भीतर गिरी 45 राज्य सरकारें- दलबदल का एक दौर ये भी था
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भारत में 1967 से 1971 के बीच राजनीतिक अस्थिरता का दौर आया, जब 45 राज्य सरकारें बनीं और गिरीं। इस समय दलबदल की घटनाओं ने लोकतंत्र पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप दलबदल विरोधी कानून का निर्माण हुआ।
- 011967-71 के बीच 45 राज्य सरकारें बनीं और गिरीं।
- 02दलबदल ने राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा दिया।
- 03कांग्रेस का एकाधिकार समाप्त हुआ और गठबंधन सरकारों का प्रयोग शुरू हुआ।
- 04राजनीतिक अस्थिरता के कारण राष्ट्रपति शासन का व्यापक प्रयोग हुआ।
- 051985 में दलबदल विरोधी कानून का निर्माण हुआ।
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1967 से 1971 के बीच भारत में राजनीतिक अस्थिरता का एक गंभीर दौर देखा गया, जिसमें 45 राज्य सरकारें बनीं और गिरीं। यह वह समय था जब कांग्रेस का एकाधिकार समाप्त हुआ और विभिन्न राज्यों में गठबंधन सरकारों का प्रयोग शुरू हुआ। इस अवधि में 16 बार अनुच्छेद 356 का प्रयोग कर राष्ट्रपति शासन लगाया गया। दलबदल की घटनाओं ने लोकतंत्र पर सवाल उठाए, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ा। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, और बिहार जैसे राज्यों में दलबदल की घटनाएं आम थीं, जहां विधायकों ने अपनी पार्टी बदली। इस अस्थिरता के कारण 1971 में इंदिरा गांधी को भारी बहुमत मिला, जिसने दलबदल की इस पहली लहर पर विराम लगाया। 1985 में राजीव गांधी सरकार ने दलबदल विरोधी कानून बनाया, जो आज भी लागू है।
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इस दलबदल के दौर ने भारतीय राजनीति में स्थिरता की आवश्यकता को उजागर किया, जिसके परिणामस्वरूप दलबदल विरोधी कानून का निर्माण हुआ।
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