सुमन अत्री: एक मां की प्रेरणादायक कहानी जो बेटी के सपनों के लिए लड़ी
Rohtak News: मां ने बेटी की खुशी की खातिर बेच दिए सपने
Amar Ujala
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सुमन अत्री, जो रोहतक में रहती हैं, ने अपनी बेटी आरजू के डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए अपने सपनों का बलिदान दिया। सुमन ने कठिनाइयों का सामना करते हुए नर्सिंग की पढ़ाई की और अब उनकी बेटी फिलीपींस में मेडिकल की पढ़ाई कर रही हैं।
- 01सुमन अत्री ने अपनी बेटी के सपनों के लिए अपने सपनों का बलिदान किया।
- 02उन्होंने आर्थिक तंगी और व्यक्तिगत संकटों का सामना किया।
- 03सुमन ने नर्सिंग की पढ़ाई करके नौकरी पाई और कर्ज चुकाया।
- 04उनकी बेटी आरजू फिलीपींस में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं।
- 05सुमन की कहानी प्रेरणा देती है कि कठिनाइयों के बावजूद सपनों को पूरा किया जा सकता है।
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सुमन अत्री की कहानी एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि कैसे एक मां अपने बच्चों के सपनों के लिए हर मुश्किल का सामना कर सकती है। सुमन ने 1998 में 16 साल की उम्र में शादी की, जिसके बाद उनकी पढ़ाई छूट गई। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और बेटे को स्कूल छोड़ते समय अपनी पढ़ाई फिर से शुरू की। सुमन ने जीएनएम (जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी) कोर्स में दाखिला लिया और 2014 में नर्स बनीं। इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी आरजू को डॉक्टर बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया। आज आरजू फिलीपींस में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं और सुमन ने अपने पति की मृत्यु के बाद भी अपने बच्चों के भविष्य को संवारने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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सुमन अत्री की कहानी प्रेरणा देती है कि किसी भी परिस्थिति में अपने सपनों को पूरा किया जा सकता है।
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