टाटा ग्रुप का आईपीओ न लाने के पीछे की वजहें
आखिर क्यों टाटा सन्स का IPO नहीं लाना चाहता टाटा ग्रुप? जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी

Image: News 18 Hindi
टाटा ग्रुप टाटा सन्स का आईपीओ लाने से हिचकिचा रहा है, मुख्यतः इसके ट्रस्ट संरचना और शापूरजी पालोनजी ग्रुप की हिस्सेदारी के कारण। टाटा सन्स के 66% शेयर टाटा ट्रस्ट्स के पास हैं, जो समाज सेवा में जाते हैं। इसके अलावा, पालोनजी ग्रुप को भारी कर्ज और शेयर हस्तांतरण में बाधाएं हैं।
- 01टाटा सन्स के 66% शेयर टाटा ट्रस्ट्स के पास हैं, जो समाज सेवा में जाते हैं।
- 02शापूरजी पालोनजी ग्रुप की टाटा सन्स में 18.37% हिस्सेदारी है, जिसकी वैल्यू करीब 3 लाख करोड़ रुपये है।
- 03सुप्रीम कोर्ट ने टाटा सन्स के शेयर हस्तांतरण नियमों को बरकरार रखा है, जिससे यह संपत्ति कैश में नहीं बदली जा सकती।
- 04पालोनजी ग्रुप पर 55,000 से 60,000 करोड़ रुपये का कर्ज है, जिसे चुकाने के लिए आईपीओ एकमात्र रास्ता है।
- 05आरबीआई ने टाटा सन्स को 'अपर लेयर NBFC' में डाल दिया है, जिससे इसकी वित्तीय स्थिति पर असर पड़ा है।
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टाटा ग्रुप, जो टाटा सन्स का आईपीओ लाने से हिचकिचा रहा है, इसके पीछे कई कारण हैं। टाटा सन्स की 66% हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट्स के पास है, जो समाज सेवा में जाती है। शापूरजी पालोनजी ग्रुप, जो टाटा सन्स का सबसे बड़ा बाहरी शेयरधारक है, के पास 18.37% हिस्सेदारी है, जिसकी वैल्यू करीब 3 लाख करोड़ रुपये है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने शेयर हस्तांतरण के नियमों को बरकरार रखा है, जिससे यह संपत्ति कैश में नहीं बदली जा सकती। इसके साथ ही, पालोनजी ग्रुप पर 55,000 से 60,000 करोड़ रुपये का भारी कर्ज है। इस स्थिति में, आईपीओ लाना उनके लिए एकमात्र विकल्प बन गया है। इसके अलावा, आरबीआई ने टाटा सन्स को 'अपर लेयर NBFC' में डाल दिया है, जिससे इसकी वित्तीय स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है।
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टाटा सन्स का आईपीओ न लाने से पालोनजी ग्रुप की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ रहा है, जिससे वे कर्ज चुकाने में मुश्किलें महसूस कर रहे हैं।
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