सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा: जांच अधिकारी 'लुका-छिपी' क्यों खेल रहा है?
'आपका जांच अधिकारी लुका-छिपी क्यों खेल रहा है?', सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा सवाल
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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से सवाल किया कि जांच अधिकारी कोर्ट के आदेशों का पालन क्यों नहीं कर रहा है। 2021 में नोएडा में हुए घृणा अपराध मामले में आईपीसी की धारा 153बी के तहत आरोप नहीं जोड़े गए। मामले की सुनवाई 19 मई को फिर से होगी।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से जांच अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया।
- 022021 में नोएडा में हुए घृणा अपराध मामले में आरोपों को सही तरीके से नहीं जोड़ा गया।
- 03जजों ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की।
- 04मामला मुस्लिम धर्मगुरु काजीम अहमद शेरवानी से जुड़ा है।
- 05सुनवाई की अगली तारीख 19 मई है।
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार से सवाल किया कि उसका जांच अधिकारी 'लुका-छिपी' क्यों खेल रहा है। कोर्ट ने 2021 में नोएडा में हुए घृणा अपराध के मामले में पुलिस द्वारा दायर हलफनामे पर असंतोष व्यक्त किया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि पुलिस ने आईपीसी की धारा 153बी के तहत आरोप नहीं जोड़े, जो विभिन्न धार्मिक और जातीय समूहों के बीच घृणा उत्पन्न करने वाले कथनों को दंडित करता है। पीड़ित के वकील ने कहा कि पुलिस ने 2023 में दर्ज एफआईआर से धारा 153बी को हटा दिया। कोर्ट ने जांच अधिकारी को तलब करने की इच्छा जताई और मामले की अगली सुनवाई 19 मई को करने का निर्देश दिया। यह मामला मुस्लिम धर्मगुरु काजीम अहमद शेरवानी की याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उनकी धार्मिक पहचान के कारण उनका अपमान किया गया।
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इस मामले की सुनवाई से घृणा अपराधों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया पर असर पड़ेगा और पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता को उजागर करेगा।
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