भारत में शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर चिंता
जागरण संपादकीय: शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर
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हाल ही में सीबीएसई और यूपी बोर्ड की परीक्षा परिणामों ने प्रतिभाशाली छात्रों की संख्या को उजागर किया है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता में कमी और छात्रों के विदेश जाने की प्रवृत्ति पर गंभीर विचार की आवश्यकता है। भारत में शोध और विकास के लिए जीडीपी का एक प्रतिशत भी खर्च नहीं किया जा रहा है, जो चिंताजनक है।
- 01सीबीएसई और यूपी बोर्ड के परीक्षा परिणामों में प्रतिभाशाली छात्रों की संख्या बढ़ी है।
- 02शिक्षा की गुणवत्ता में कमी और छात्रों का विदेश जाने का चलन बढ़ रहा है।
- 03भारत जीडीपी का एक प्रतिशत भी शोध पर खर्च नहीं करता।
- 04निजी स्कूलों का नियमन सही तरीके से नहीं हो रहा है।
- 05स्कूली शिक्षा में कोचिंग संस्कृति का बढ़ता उद्योग एक चिंता का विषय है।
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और उत्तर प्रदेश (यूपी) बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के परिणामों ने प्रतिभाशाली छात्रों की संख्या को उजागर किया है। हालांकि, यह सवाल उठता है कि क्या देश में आवश्यक प्रतिभाओं का विकास हो रहा है। शिक्षा की गुणवत्ता में कमी और छात्रों का विदेश पढ़ाई के लिए जाना एक गंभीर मुद्दा है। भारत अपनी जीडीपी का केवल 1% शोध पर खर्च करता है, जबकि कई विकासशील देश 4-5% खर्च करते हैं। इसके अलावा, निजी स्कूलों का नियमन सही तरीके से नहीं हो रहा है, जिससे छात्रों और अभिभावकों पर दबाव बढ़ रहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस पर संज्ञान लिया है। इसके साथ ही, स्कूली शिक्षा में कोचिंग संस्कृति का बढ़ता उद्योग भी चिंता का विषय है।
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शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार से छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे और देश में शोध एवं विकास को बढ़ावा मिलेगा।
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