बीआर चोपड़ा की 'साधना': वेश्याओं की कहानी पर आधारित फिल्म ने मचाया था हड़कंप
'बहू बनकर आई थी, वेश्या बनकर बाहर नहीं जा सकती', 'महाभारत' के बीआर चोपड़ा की इस फिल्म से मचा था हड़कंप
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
फिल्म निर्माता बीआर चोपड़ा की फिल्म 'साधना' 1958 में वेश्याओं के पुनर्वास की कहानी को दर्शाती है। इस फिल्म ने समाज में वेश्याओं के प्रति सोच को चुनौती दी और रिलीज के बाद महिलाओं की भीड़ मराठा मंदिर में उमड़ पड़ी।
- 01बीआर चोपड़ा ने सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्में बनाईं।
- 02फिल्म 'साधना' ने वेश्याओं के पुनर्वास का संदेश दिया।
- 03फिल्म का अंत समाज के प्रति एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।
- 04चोपड़ा ने पहले ही असफल फिल्मों के बावजूद अपनी कहानी पर विश्वास रखा।
- 05फिल्म ने दर्शकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी।
Advertisement
In-Article Ad
बीआर चोपड़ा, भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध फिल्म निर्माता, ने 1958 में 'साधना' नामक फिल्म बनाई, जो वेश्याओं के जीवन और उनके पुनर्वास पर आधारित थी। इस फिल्म में वैजयंतीमाला ने चंपा का किरदार निभाया, जो एक वेश्या थी और एक कॉलेज लेक्चरर मोहन (सुनील दत्त) से प्यार करती है। फिल्म ने समाज में वेश्याओं के प्रति सोच को चुनौती दी और उन्हें मुख्यधारा में लाने का मुद्दा उठाया। चोपड़ा ने फिल्म के अंत को बदलकर एक सकारात्मक संदेश दिया, जिसमें मां अपनी बेटी से कहती है, 'तुम इस घर में बहू बनकर आई थी, वेश्या बनकर बाहर नहीं जा सकती।' फिल्म की रिलीज के बाद मराठा मंदिर में महिलाओं की भीड़ लग गई, और चोपड़ा ने अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। 'साधना' ने न केवल वेश्याओं की कहानी को उजागर किया, बल्कि उन्हें सम्मान और पुनर्वास का संदेश भी दिया।
Advertisement
In-Article Ad
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि भारतीय सिनेमा में सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्में बननी चाहिए?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।



