आयकर रिटर्न 2026: वेरिफिकेशन के महत्व और प्रक्रिया
ITR Filing 2026: रिटर्न भरने से ही नहीं बनेगी बात, इसे वेरिफाई करना भी जरूरी, इन तरीकों से निपटाएं ये जरूरी काम
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आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया 31 जुलाई 2026 तक जारी है, लेकिन इसे वेरिफाई करना भी आवश्यक है। बिना वेरिफिकेशन के, ITR अमान्य हो सकता है। वेरिफिकेशन के विभिन्न तरीके जैसे आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग और फिजिकल कॉपी भेजना शामिल हैं।
- 01आयकरदाता 31 जुलाई 2026 तक ITR दाखिल कर सकते हैं।
- 02ITR को वेरिफाई करना अनिवार्य है, अन्यथा यह अमान्य हो जाएगा।
- 03वेरिफिकेशन की प्रक्रिया में 15 से 45 दिन का समय लग सकता है।
- 04आधार ओटीपी के माध्यम से वेरिफाई करने के लिए पैन और मोबाइल नंबर को लिंक करना आवश्यक है।
- 05यदि ई-वेरिफाई नहीं कर सकते, तो ITR-V को डाउनलोड करके हस्ताक्षर कर भेजना होगा।
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नई दिल्ली में आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया 31 जुलाई 2026 तक चल रही है। करदाताओं को यह ध्यान रखना होगा कि केवल ITR भरना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे वेरिफाई करना भी आवश्यक है। यदि कोई करदाता ITR को वेरिफाई नहीं करता है, तो आयकर विभाग इसे अमान्य घोषित कर सकता है। वेरिफिकेशन के लिए कई तरीके उपलब्ध हैं, जैसे आधार ओटीपी का उपयोग करना, नेट बैंकिंग के माध्यम से वेरिफाई करना, या ITR-V की फिजिकल कॉपी भेजना। आधार ओटीपी के जरिए वेरिफिकेशन करने के लिए, करदाता को अपने आधार को पैन और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से लिंक करना होगा। इसके बाद, ई-फाइलिंग पोर्टल पर 'Verify Using Aadhaar OTP' विकल्प चुनकर प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। यदि कोई ई-वेरिफाई नहीं कर सकता, तो उसे ITR-V डाउनलोड करके उसे बेंगलुरु स्थित सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) भेजना होगा।
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ITR वेरिफिकेशन की प्रक्रिया करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि बिना वेरिफिकेशन के रिटर्न अमान्य हो सकता है।
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