आईआईआईटी दिल्ली के शोध में 26 देशों के व्यंजनों का गणितीय विश्लेषण
IIIT दिल्ली का शोध, हर व्यंजन के पीछे काम करते हैं गणितीय नियम; 26 देशों के व्यंजन का किया गया विश्लेषण
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इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी), दिल्ली के शोधकर्ताओं ने 26 देशों की 1.18 लाख रेसिपियों का विश्लेषण किया है। इस अध्ययन में चार प्रमुख गणितीय पैटर्न सामने आए हैं, जो विभिन्न संस्कृतियों के व्यंजनों के निर्माण में समानता दर्शाते हैं।
- 01शोध में 26 देशों की 1.18 लाख रेसिपियों का विश्लेषण किया गया।
- 02चार प्रमुख गणितीय पैटर्न सामने आए हैं जो व्यंजनों के निर्माण में समानता दर्शाते हैं।
- 03ज़िप्फ का नियम के अनुसार, कुछ सामग्री हर व्यंजन में बार-बार उपयोग होती हैं।
- 04कम सामग्री वाले व्यंजन अक्सर विशिष्ट सामग्री पर निर्भर करते हैं।
- 05खाना बनाना एक संरचित प्रणाली है, जिसमें गणितीय नियम काम करते हैं।
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इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली के शोधकर्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से 26 देशों और क्षेत्रों की 1.18 लाख से अधिक रेसिपियों का विश्लेषण किया है। इस अध्ययन में चार प्रमुख गणितीय पैटर्न सामने आए हैं। पहला, ‘ज़िप्फ का नियम’, जो बताता है कि नमक, प्याज, तेल और मक्खन जैसी सामग्री लगभग हर व्यंजन में बार-बार उपयोग होती हैं। दूसरा, नई रेसिपियों के जुड़ने पर नई सामग्री मिलने की दर घटती है। तीसरा, कम सामग्री वाले व्यंजन अक्सर दुर्लभ सामग्री पर निर्भर करते हैं, जबकि जटिल व्यंजनों में सामान्य सामग्री का अधिक उपयोग होता है। चौथा, प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट का अनुपात भी एक निश्चित सांख्यिकीय पैटर्न का पालन करता है। प्रोफेसर गणेश बागलर के अनुसार, खाना बनाना एक संरचित प्रणाली है, जिसमें रचनात्मकता के पीछे स्पष्ट गणितीय नियम काम करते हैं। इस शोध ने यह साबित किया है कि दुनिया के किसी भी कोने में भोजन का स्वाद भले अलग हो, लेकिन उसके पीछे छिपी पाक-भाषा का गणित लगभग समान है।
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