भारत में सुपर एल नीन्यो का प्रभाव: गर्मी के रिकॉर्ड टूटने की आशंका
भट्टी की तरह तपेगी धरती, 150 साल का टूटेगा रिकॉर्ड! भारत पर सुपर अल नीनो का विनाशकारी असर
News 18 Hindi
Image: News 18 Hindi
इस वर्ष भारत में 'सुपर एल नीन्यो' के कारण अत्यधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे तापमान 45-48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। यह स्थिति भारत के मानसून को भी प्रभावित कर सकती है, जिससे बारिश की कमी और गर्मी की बढ़ती अवधि की आशंका है।
- 01एल नीन्यो एक मौसम परिवर्तन है जो हर 2 से 7 साल में होता है, जिससे प्रशांत महासागर का पानी गर्म होता है।
- 02इस वर्ष के सुपर एल नीन्यो के कारण भारत में तापमान 45-48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
- 03सुपर एल नीन्यो के प्रभाव से भारत का मानसून कमजोर हो सकता है, जिससे बारिश की कमी और गर्मी की अवधि बढ़ सकती है।
- 042023 में भी एल नीन्यो के कारण भारत के कई शहरों में तापमान 45-48 डिग्री तक पहुंच गया था।
- 05भारत में गर्मी का बढ़ता तापमान मुख्य रूप से उत्तर भारत, मध्य भारत और राजस्थान जैसे क्षेत्रों को प्रभावित करेगा।
Advertisement
In-Article Ad
इस वर्ष भारत में मौसम का मिजाज 'सुपर एल नीन्यो' के कारण बेहद गर्म रहने की संभावना है। 'एल नीन्यो' एक मौसम परिवर्तन है, जो हर 2 से 7 साल में होता है और दक्षिण अमेरिका के पास प्रशांत महासागर में गर्म पानी के जमाव से संबंधित है। इस बार के सुपर एल नीन्यो के कारण भारत में तापमान 45-48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इससे न केवल गर्मी बढ़ेगी, बल्कि भारत के मानसून पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष मानसून कमजोर रहेगा, जिससे बारिश की कमी और गर्मी की अवधि में वृद्धि हो सकती है। 2023 में भी एल नीन्यो के प्रभाव के कारण कई भारतीय शहरों में तापमान अत्यधिक बढ़ गया था, जिससे गर्मी की लंबी अवधि का सामना करना पड़ा। इस बार, विशेष रूप से उत्तर भारत, मध्य भारत और राजस्थान जैसे क्षेत्रों में अधिक गर्मी का अनुभव किया जा सकता है।
Advertisement
In-Article Ad
इस वर्ष भारत में अत्यधिक गर्मी और कमजोर मानसून से कृषि और जल संसाधनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि सरकार को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए अधिक कदम उठाने चाहिए?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।



