सात अद्भुत फिल्में जो अब नहीं मिलेंगी
ढूंढने से भी नहीं मिलेंगी ये 7 फिल्में, बनाने वाले भी अब दुनिया में नहीं

Image: Aaj Tak
कुछ फिल्में ऐसी हैं जो अब ढूंढने पर भी नहीं मिलतीं, जैसे 1917 की 'क्लियोपेट्रा', जो आग में जल गई, और अल्फ्रेड हिचकॉक की 'द माउंटेन इगल', जो पूरी तरह खो गई है। इन फिल्मों के पीछे की कहानियाँ और उनके अस्तित्व के संकट दर्शकों के लिए दिलचस्प हैं।
- 01'क्लियोपेट्रा' (1917) की सभी कॉपी गुम हो गईं, केवल 20-40 सेकंड का फुटेज बचा है।
- 02'द माउंटेन इगल' अल्फ्रेड हिचकॉक की एक शुरुआती फिल्म है, जो आज तक नहीं मिली।
- 03'द पेट्रियट' (1928) एकमात्र ऑस्कर नॉमिनेटेड फिल्म है जो पूरी तरह खो गई है।
- 04'लंदन आफ्टर मिडनाइट' का आखिरी प्रिंट 1965 में आग में जल गया।
- 05'किसन कन्या' भारत की पहली कलर फीचर फिल्म थी, लेकिन अधिकांश प्रिंट खराब हो गए हैं।
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फिल्मों के इतिहास में कई ऐसी कृतियाँ हैं जो अब ढूंढने पर भी नहीं मिलतीं। इनमें से एक है 'क्लियोपेट्रा' (1917), जो उस समय की बेहतरीन साइलेंट फिल्मों में से एक थी। इस फिल्म की सभी कॉपी गुम हो गईं और केवल 20-40 सेकंड का फुटेज बचा है। अल्फ्रेड हिचकॉक की शुरुआती फिल्म 'द माउंटेन इगल' भी पूरी तरह खो गई है। 'द पेट्रियट' (1928) एकमात्र ऑस्कर नॉमिनेटेड फिल्म है जो पूरी तरह से गुम हो चुकी है, जबकि 'लंदन आफ्टर मिडनाइट' का आखिरी प्रिंट 1965 में आग में जल गया। भारतीय सिनेमा में, 'शिरीन फरहान' और 'किसन कन्या' जैसी फिल्में भी समय के साथ खो गई हैं। ये फिल्में न केवल अपने समय की कला का प्रतिनिधित्व करती हैं, बल्कि उनके अस्तित्व का संकट भी दर्शाती हैं। आज इन फिल्मों का केवल नाम और कुछ तस्वीरें ही शेष हैं, जो दर्शकों को एक अद्भुत यात्रा पर ले जाती हैं।
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