जम्मू-कश्मीर में स्मार्ट क्लासरूम की कमी, 83.5% छात्र वंचित
डिजिटल इंडिया की रेस में पीछे छूटता जम्मू-कश्मीर, अब भी 83.5% स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र स्मार्ट क्लासरूम से वंचित
Jagran
Image: Jagran
जम्मू-कश्मीर में डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ते हुए, 83.5% स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा नहीं है। यह स्थिति प्रदेश सरकार के शिक्षा सुधारों की वास्तविकता को उजागर करती है, जबकि अन्य राज्यों में स्मार्ट क्लासरूम की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
- 01जम्मू-कश्मीर में केवल 16.5% स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम हैं।
- 02प्रदेश देश के 28 राज्यों में डिजिटल शिक्षा में 32वें स्थान पर है।
- 03स्मार्ट क्लासरूम में प्रोजेक्टर और ई-रिसोर्स जैसी सुविधाएं होती हैं।
- 04बिहार और झारखंड जैसे राज्यों का प्रदर्शन भी जम्मू-कश्मीर से कमजोर है।
- 05शिक्षकों को तकनीकी प्रशिक्षण और बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता है।
Advertisement
In-Article Ad
जम्मू-कश्मीर में डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में गंभीर कमी देखी जा रही है, जहां 83.5% स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा नहीं है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर देश के 28 राज्यों में डिजिटल शिक्षा में 32वें स्थान पर है। वर्ष 2024-25 तक केवल 16.5% स्कूलों में कार्यात्मक स्मार्ट क्लासरूम उपलब्ध होंगे, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। स्मार्ट क्लासरूम में प्रोजेक्टर, इंटरेक्टिव व्हाइटबोर्ड और ई-रिसोर्स जैसी सुविधाएं होती हैं, जो विद्यार्थियों की पढ़ाई को अधिक रोचक और प्रभावी बनाती हैं। हालांकि, जम्मू-कश्मीर में दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी संसाधनों की कमी इस विस्तार में बाधा बनी हुई है। शिक्षाविदों का मानना है कि नई शिक्षा नीति को प्रभावी बनाने के लिए स्मार्ट क्लासरूम का तेजी से विस्तार आवश्यक है।
Advertisement
In-Article Ad
यदि डिजिटल शिक्षा ढांचे को मजबूत नहीं किया गया, तो जम्मू-कश्मीर के विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में पीछे रह सकते हैं।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि जम्मू-कश्मीर में डिजिटल शिक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।



