अफ्रीका महाद्वीप के टूटने की प्रक्रिया में तेजी, वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ी
Africa Splitting: अफ्रीका महाद्वीप 2 हिस्सों में टूट रहा, सोच से बड़ी हो चुकी है धरती के क्रस्ट की दरार, वैज्ञानिकों की बढ़ी टेंशन
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
अफ्रीका में भूगर्भीय हलचल के कारण महाद्वीप दो हिस्सों में टूट रहा है। वैज्ञानिकों ने बताया है कि पूर्वी अफ्रीका में धरती की पपड़ी अत्यधिक पतली हो गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि एक नया महासागर बनने की प्रक्रिया शुरू हो रही है।
- 01पूर्वी अफ्रीका में धरती की पपड़ी अत्यधिक पतली हो गई है।
- 02अफ्रीकी और सोमाली प्लेटें प्रति वर्ष 4.7 मिलीमीटर की दर से एक-दूसरे से दूर जा रही हैं।
- 03तुरकाना रिफ्ट लगभग 4.5 करोड़ साल पहले खुलना शुरू हुआ था।
- 04नए महासागर के बनने की प्रक्रिया में लाखों साल लग सकते हैं।
- 05वैज्ञानिकों के अनुसार, दरार की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक उन्नत हो चुकी है।
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अफ्रीका महाद्वीप में एक महत्वपूर्ण भूगर्भीय हलचल हो रही है, जिसके कारण यह दो हिस्सों में टूट रहा है। पूर्वी अफ्रीका में धरती की पपड़ी (Crust) की मोटाई लगभग 13 किलोमीटर है, जबकि इससे दूर यह 35 किलोमीटर से अधिक है। यह दरार, जिसे तुर्काना रिफ्ट कहा जाता है, केन्या और इथियोपिया में लगभग 500 किलोमीटर तक फैली हुई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अफ्रीकी और सोमाली प्लेटें प्रति वर्ष 4.7 मिलीमीटर की दर से एक-दूसरे से दूर जा रही हैं। यह प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक उन्नत हो चुकी है, और इसके परिणामस्वरूप एक नया महासागर बनने की संभावना है, हालांकि इसके लिए लाखों साल लग सकते हैं।
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यदि यह प्रक्रिया जारी रहती है, तो पूर्वी अफ्रीका में भौगोलिक बदलावों से स्थानीय निवासियों और पारिस्थितिकी पर प्रभाव पड़ सकता है।
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