किसानों की प्याज खरीद में राहत, लेकिन कम दामों से निराश
प्याज खरीद के नियम तो बदले पर किसान खुश नहीं, मांग: असली समस्या मिल रहे कम दाम से, उसे बढ़ाना जरूरी

Image: Business Standard
केंद्र सरकार ने प्याज की सरकारी खरीद के नियमों में ढील दी है, जिससे प्याज के साइज और क्वालिटी के मानक सरल हुए हैं। हालांकि, किसान असली समस्या कम दामों को मानते हैं और न्यूनतम खरीद मूल्य 3,000 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं।
- 01सरकार ने प्याज के साइज मानक को 35 से 70 मिलीमीटर कर दिया है।
- 02किसान 3,000 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम खरीद मूल्य की मांग कर रहे हैं।
- 03NAFED और NCCF जैसी एजेंसियां किसानों को 1,580 रुपये प्रति क्विंटल का भाव दे रही हैं।
- 04किसानों का कहना है कि प्याज उगाने की लागत औसतन 1,800 रुपये प्रति क्विंटल है।
- 05किसान संगठन पारदर्शिता और सब्सिडी की मांग कर रहे हैं।
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केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के प्याज उत्पादकों के लिए सरकारी खरीद के नियमों में ढील दी है, जिससे प्याज के साइज और क्वालिटी के मानक सरल हो गए हैं। अब प्याज का साइज 35 से 70 मिलीमीटर के बीच खरीदा जा सकेगा। हालांकि, किसान संगठनों ने इसे नाकाफी बताया है, क्योंकि असली समस्या प्याज के कम दामों की है। किसान 3,000 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम खरीद मूल्य की मांग कर रहे हैं, जबकि वर्तमान में उन्हें 1,580 रुपये का भाव मिल रहा है, जो खेती की लागत से भी कम है। किसानों का कहना है कि इस स्थिति में उन्हें घाटा हो रहा है। इसके अलावा, किसान संगठन पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं और चाहते हैं कि सरकार उन्हें सब्सिडी प्रदान करे। महाराष्ट्र सरकार ने प्याज की खरीद प्रक्रिया को तेज करने के लिए मंडी फीस माफ कर दी है, लेकिन किसान नेताओं का कहना है कि इससे उन्हें वास्तविक लाभ तभी होगा जब खरीद दाम बढ़ाए जाएंगे।
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किसानों को कम दामों के कारण आर्थिक नुकसान हो रहा है, जिससे उनकी खेती की लागत भी नहीं निकल पा रही है।
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