रायपुर में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत हरी खाद तकनीक का प्रदर्शन
‘खेत बचाओ अभियान‘ के तहत एनआईबीएसएम द्वारा हरी खाद तकनीक का सजीव प्रदर्शन

Image: Globalherald
रायपुर में आईसीएआर-एनआईबीएसएम ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों के लिए हरी खाद तकनीक का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में 92 किसानों ने भाग लिया, जिसमें हरी खाद के फायदों और उपयोगिता पर चर्चा की गई। वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओं का समाधान किया और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
- 01कार्यक्रम में 92 किसानों ने भाग लिया और हरी खाद के महत्व को समझा।
- 02डॉ. पी.के. राय ने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
- 03डॉ. पंकज शर्मा ने हरी खाद को मिट्टी में मिलाने का सजीव प्रदर्शन किया।
- 04डॉ. अनिल दीक्षित ने हरी खाद के उपयोग से मृदा स्वास्थ्य में सुधार की जानकारी दी।
- 05कार्यक्रम में स्थानीय सरपंचों ने भी भाग लिया और किसानों को प्रोत्साहित किया।
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रायपुर में आईसीएआर-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर-एनआईबीएसएम) ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत ग्राम बिठिया एवं मोहदी के किसानों के लिए हरी खाद तकनीक का सजीव प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम में 92 किसानों ने भाग लिया, जहां हरी खाद के महत्व और उपयोगिता पर चर्चा की गई। डॉ. पी.के. राय ने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और टिकाऊ कृषि उपायों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. पंकज शर्मा ने हरी खाद को मिट्टी में मिलाने का प्रदर्शन किया, जिससे मृदा में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ती है। डॉ. अनिल दीक्षित ने बताया कि हरी खाद के उपयोग से मृदा स्वास्थ्य और जलधारण क्षमता में वृद्धि होती है। कार्यक्रम में ग्राम बिठिया के सरपंच दुश्यंत साहू और ग्राम मोहदी की सरपंच कावेरी वर्मा ने भी भाग लिया। वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओं का समाधान किया और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
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यह कार्यक्रम किसानों को हरी खाद तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करता है, जिससे मृदा स्वास्थ्य में सुधार होगा।
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